टीचर्स डे के मौके पर पढ़िए एक ऐसे शख्स की कहानी, जो हर साल अपनी सैलरी से 10 लड़कियों की जिंदगी संवारता है। इनके बारे में जानकर गर्व होगा आपको।
ये हैं हिसार के नारनौंद निवासी अजय लोहान। गेस्ट टीचर के रूप में सरकारी स्कूल में पढ़ाना शुरू किया और अंग्रेजी माध्यम शुरू कर हरियाणा का पहला इंग्लिश मीडियम स्कूल बना दिया। जिस स्कूल के बच्चे अंग्रेजी समझ भी नहीं पाते थे, अब वे अंग्रेजी में बात करते हैं। अजय लोहान पिछले 10 सालों से स्कूल से मिलने वाली अपनी तनख्वाह को बच्चों पर ही खर्च कर रहे हैं।
अजय से जब इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने मुस्कराते हुए कहा कि मैं स्कूल का पैसा स्कूल पर व बच्चों पर ही लगाता हूं। जो बच्चे पैसे की कमी की वजह से स्कूल की किताबें या स्टेशनरी नहीं ले पाते उनके लिए ज़रूरी चीज़ें खरीद लेता हूं। जरूरतमंद व गरीब बच्चों को किताब कॉपी बांटकर मुझे बड़ा सुकून मिलता है।
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कई पुरस्कारों से सम्मानित हुए अजय
अजय लोहान को उनके प्रयासों के लिए हरियाणा गौरव अवार्ड, बेस्ट स्टेट मोटिवेशन अवार्ड, बेस्ट टीचर अवार्ड, प्राणनाथ प्रणामी अवार्ड, हरियाणा संस्कृति संरक्षक अवार्ड, बेस्ट पार्लियामेंट आर्गेनाईजेशन अवार्ड व कक्षा तत्परता कार्यक्रम के तहत उत्कृष्ठ सेवाओं के लिए गोल्ड़ मेडल मिल चुका है।
ये है विशेष उपलब्धियां
अजय द्वारा पढ़ाए गए बच्चों में से 5 छात्र वर्ष 2013-14 में लेफ्टिनेंट के पद पर चयनित हुए। इतना ही नहीं 3 बच्चे डॉक्टर, 2 बच्चं का आई.आई.टी. मुंबई में चयन, 34 बच्चे इंजीनियर बने और 112 बच्चों का चयन दिल्ली व पंजाब यूनिवर्सिटी में हुआ है। उनके द्वारा पढ़ाए गए 200 से भी ज़्यादा विद्यार्थियों को विभिन्न परीक्षाओं के माध्यम से छात्रवृति मिल चुकी है और 29 बच्चों को राष्ट्रीय छात्रवृत्ति मिल रही है।
पिता के पदचिह्नों पर चल रहे अजय
अजय लोहान ने नारनौंद के जिस राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल में अपनी सेवाएं दी हैं उनके पिता भी उसी स्कूल में शिक्षक रह चुके हैं। अजय के पिता स्वर्गीय रामनिवास लोहान इसी स्कूल में राजनीती शास्त्र के प्राध्यापक रह चुके हैं। अजय कहते हैं कि पिता से मिली प्रेरणाओं के चलते ही वे शिक्षक बने।
हैप्पी टीचर्स डे
हर साल 10 लड़कियों को पढ़ाते हैं अपने खर्चे पर
जिस मुहीम को हरियाणा सरकार ने अब शुरू किया है उस मुहीम को अजय लोहान पिछले कई सालों से चला कर बालिका शिक्षा को बढ़ावा दे रहे है। गरीब लड़कियां शिक्षा से वंचित न रहे इसके लिए वो अपने खर्चे से 10 लड़कियों को पढ़ाकर अतुल्य कार्य कर रहे हैं।
इंफोसिस ने भी माना अजय के प्रयासों का लोहा
अजय लोहान के प्रयासों का लोहा प्रसिद्ध कंप्यूटर व सॉफ्टवेयर कंपनी इंफोसिस ने भी माना है। अजय बच्चों को कंपनी के हेड ऑफिस लेकर गए थे, उस दौरान बच्चों की प्रतिभा से प्रभावित होकर और अजय के अनुरोध पर कंपनी ने बच्चों की पढ़ाई के लिए 10 कंप्यूटर भी देने का फैसला लिया जिससे आज बच्चे तकनिकी शिक्षा का लाभ ले रहे है। इतना ही नहीं कंपनी ने उनके द्वारा किए गए अनुरोध पर 10 कंप्यूटर और देने की बात को स्वीकार कर लिया है।
कुर्सी से है सख्त नफरत
अजय लोहान पिछले 9 सालों से कभी भी कुर्सी पर नहीं बैठे हैं। कक्षा में हमेशा खड़े रहकर पढ़ाने वाले अजय ने अपने लक्ष्य के बारे में बताते हुए कहा कि वे शिक्षा के दम पर राष्ट्रीय स्तर पर अपना व अपने गांव का नाम रोशन करना चाहते हैं।
हरियाणवी संस्कृति के संरक्षक भी है अजय लोहान
ऐसा नहीं है कि इस अध्यापक को केवल अंग्रेजी से ही लगाव है बल्कि नारनौंद निवासी अध्यापक अजय लोहान पिछले 14 सालों से हरियाणवीं संस्कृति के प्रसार व प्रचार में जुटे हैं। अजय लोहान अपने छात्र जीवन में मिलने वाले जेब खर्च की रकम को भी हरिणाणवीं संस्कृति को बचाने में जुटे हुए हैं। वे वर्ष 2001से हरियाणवीं सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से हरियाणवीं संस्कृति का प्रसार कर रहें है।