अपनी मांगों के लिए लंबे समय से संघर्ष कर रहे अध्यापकों ने काली दिवाली मनाई। बड़ी संख्या में अध्यापक अपने बच्चों के साथ देश भगत हॉल में इकट्ठे हुए। वहां से हाथों में काली झंडियां पकड़ रोष मार्च निकाला और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
आशीष जुलाहा, गगन शर्मा ने कहा कि सरकार ने कई बार उनसे उनकी मांगों को पूरा करने का वादा किया लेकिन हर बार अपनी बात से पलट गई। इन नेताओं ने कहा कि इस बार काली दिवाली इसलिए मना रहे हैं ताकि सरकार को नींद से जगाया जा सके। अगर सरकार ने उनकी मांगे न मानी तो यह संघर्ष आगे भी जारी रहेगा।
वहीं लुधियाना में भी सांझा अध्यापक मोर्चा पंजाब की ओर से लिए गए फैसले के अनुसार मुख्यमंत्री द्वारा अध्यापकों के मामले के हल के लिए पांच नवंबर को मीटिंग न करने और अध्यापकों के प्रति बुरे व्यवहार के चलते सात नवंबर को काली दिवाली मनाई गई। इस दौरान दुर्गा माता मंदिर से घंटाघर तक और फिर घंटा घर से दुर्गा माता मंदिर तक मार्च करके कैप्टन सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
हरदेव सिंह, अजीतपाल, राजवीर, शिंगारा सिंह जरखड़ ने बताया कि सरकार की ओर से अध्यापकों को रेगुलर करने के नाम पर तनख्वाहों में 75 प्रतिशत तक की कटौती दे कर धोखा किया गया है। अध्यापक नेताओं ने कहा कि मांगें पूरी न होने तक उनका संघर्ष जारी रहेगा और आने वाले समय में गांवों, शहरों में माता-पिता, संघर्षशील किसान, मजदूर-मुलाजिम जत्थेबंदियां को साथ लेकर सरकार के खिलाफ संघर्ष ओर तेज करेंगे। इस मौके पर नमिता, रजिंदर कौर, अमनदीप सिंह, हरविंदर सिंह, चरण सिंह सराभा, जोगिंदर आजाद, मलकीत सिंह, बिक्रमजीत सिंह, रमनजीत सिंह और प्रभजीत सिंह मौजूद रहे।