मां भारती जन जागृति फाउंडेशन के बाल कृष्ण ने कहा कि लोग बच्चों को स्कूल इसलिए भेजते हैं कि वे सभ्य बने और अपनी संस्कृति व परंपरा से जुड़े रहें। ऐसे में स्कूलों की यह जिम्मेदारी बनती है कि वे विद्यार्थियों को उनकी संस्कृति के प्रति जागरूक करने व उसका अनुसरण करने के लिए प्रेरित करे, परंतु स्कूल में इसके विपरीत कार्य किया जा रहा है।
विद्यार्थियों को धर्म और परंपरा का अनुसरण करने का पूरा अधिकार है। यदि कोई विद्यार्थी यूनिफार्म के साथ तिलक लगाकर आता है तो यह गलत नहीं है, परंतु ऐसे किसी मामले की उनके पास शिकायत नहीं आई है। यदि शिकायत आती है तो जांच करवाई जाएगी और कार्रवाई भी की जाएगी। -विनोद कौशिक, जिला शिक्षा अधिकारी।
तेजाब से तिलक मिटाने के आरोप गलत हैं। शिखा और तिलक रखने का भी विरोध नहीं किया गया है, बल्कि उन्हें व्यवस्थित तरीके से रखने के लिए कहा गया था। शिखा बड़ी होने पर उसे बांधने और तिलक मध्यम लगाने के लिए कहा गया था। स्कूल में अनुशासन सिखाया जाता है और यह सभी चीजें इसके दायरे में आती हैं। स्कूल किसी के धर्म, आस्था, विचार व अभिव्यक्ति की आजादी का विरोध नहीं करता है। अभिभावकों से बात हुई थी और मामला निपट गया है। - वीके कासिव, प्रिंसिपल डीएवी पब्लिक स्कूल।