बेबस प्रशासन: 31 मार्च को दाम तय किए, अब तक एग्रीगेटर कंपनियों ने नहीं किया लागू
चंडीगढ़ प्रशासन ने बीते दिनों कैब-टैक्सी के लिए नए दाम तय किए थे लेकिन इन दामों को तय करने का कोई फायदा नहीं, क्योंकि शहर में ज्यादातर टैक्सी-कैब एग्रीगेटर कंपनियों से चलती हैं और ये कंपनियां प्रशासन के दामों को मानती ही नहीं। पिछले कई वर्षों से ऐसा ही चलता आ रहा है लेकिन अधिकारी पता होने के बावजूद कुछ नहीं कर पा रहे हैं।
कैब चालकों का कहना है कि प्रशासन के अधिकारी दाम तय कर महज खानापूर्ति करते हैं। एग्रीगेटर कंपनियां इतनी बड़ी हो चुकी हैं कि वह चालकों का तो शोषण कर ही रही हैं, प्रशासन के नियमों को भी नहीं मानतीं। प्रशासन के अधिकारियों को भी मालूम है कि कैब चलाने वाली मोबाइल बेस्ड सभी कंपनियां प्रशासन के आदेशों को नहीं मान रही हैं। इसके बावजूद वो हाथ पर हाथ धरे बैठे हुए हैं।
चालकों का कहना है कि एग्रीगेटर कंपनियों ने उनसे बड़े वादे किए थे लेकिन अब हालत ये हैं वे अपनी लागत भी नहीं निकाल पा रहे हैं। गाड़ियों की किस्त देनी भी मुश्किल हो रही है। चालकों ने पांच से सात लाख रुपये निवेश किए लेकिन अब वे फंस गए हैं। कंपनियां मनमानी कर रही हैं। टैक्सी संचालक से गलत कैंसिलेशन चार्ज लिया जाता है। इसके अलावा लगातार पेट्रोल, डीजल और सीएनजी के दाम बढ़ रहे हैं लेकिन कंपनी की ओर से मिलने वाले कमीशन में बढ़ोतरी नहीं की जा रही है।
एग्रीगेटर कंपनी तय करती है दाम, न चाहते हुए भी चुकाते हैं लोग
प्रशासन की तरफ से प्रति किमी दाम तय है लेकिन एग्रीगेटर कंपनियां उन दामों को न मानकर अपने खुद के दाम चालकों व उपभोक्ताओं पर थोपतीं हैं जो न चाहते हुए भी लोगों को चुकाने पड़ते हैं। प्रशासन के नियमों के अनुसार कंपनी सिर्फ रात में 25 फीसदी ज्यादा चार्ज कर सकती है लेकिन ये कंपनियां रात के साथ सुबह और शाम को जब पीक आवर्स होते हैं तो दाम कई गुना बढ़ा देती हैं।
नियमों के अनुसार अगर किसी को एक किमी तक जाना है तो उसके लिए 34 रुपये प्रशासन ने तय किए हैं लेकिन ये कंपनियां इससे दोगुने दाम वसूलती हैं। ये पूरी तरह प्रशासन के नियमों की अवहेलना है। चालकों का कहना है कि प्रशासन इन कंपनियों को शहर में गाड़ी चलाने के लिए लाइसेंस देता है। वर्षों से ये नियमों को तोड़ रहे हैं लेकिन अधिकारी कोई कार्रवाई नहीं करते। ये सब मिलीभगत से हो रहा है।
अधिकारियों की मिलीभगत से हो रहा ऐसा
ये कंपनियां प्रशासन के नियमों को ही नहीं मानती। इनमें प्रशासन का डर ही नहीं है, क्योंकि सब मिलीभगत से चल रहा है। वर्षों से कंपनियां गड़बड़ कर रही हैं लेकिन एसटीए की कोई सख्ती नहीं है। पेट्रोल, डीजल और सीएनजी के दाम आसमान छू रहे हैं। गाड़ी लोन पर लेकर ड्राइवर फंस चुके हैं। कंपनियों भी ये पता है, इसलिए वह शोषण कर रही हैं। हर तरफ से चालकों को दबाया जा रहा है। - अमृत संधू, टैक्सी चालक व प्रधान खालसा ग्रुप
नहीं निकल रही गाड़ी की किस्त, घर चलाना भी मुश्किल
मैंने 6 महीने पहले गाड़ी लोन पर खरीदी थी। उस समय सीएनजी का दाम 55 रुपये था और अब 81 रुपये हो गया है। कंपनी का कमीशन बढ़ रहा है लेकिन चालकों को कुछ नहीं मिल रहा। गाड़ी की किस्त भी नहीं निकल रही है। घर चलाना मुश्किल हो गया है। कंपनियों की कथनी और करनी में बहुत बड़ा फर्क है। उन्हें पता है कि गाड़ियां लोन पर हैं, इसलिए चालक कहीं जा नहीं सकते। - जिम्मी जोशी, कैब चालक व अध्यक्ष ऑलराउंडर ग्रुप
सरकारी रेट का आधा भी नहीं मिल रहा
पेट्रोल, डीजल और सीएनजी के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। प्रशासन ने भी दाम बढ़ा दिए हैं लेकिन उसका फायदा क्या, जब कंपनियां उसे लागू ही नहीं कर रहीं। हम 5 किमी भी जाते हैं, तो 50 रुपये के करीब मिलता है। उसमें भी कंपनी 30 प्रतिशत कमीशन ले लेती है। सरकारी रेट का आधा भी नहीं मिल रहा है। सरकार से हमारी यही मांग है कि हमें सही दाम दिलाया जाए और कंपनियों की मनमर्जी बंद हो। - रजनीश कुमार, सचिव, पंचकूला कैब यूनियन
प्रशासन के दाम हमें कभी मिले ही नहीं
प्रशासन ने जो दाम तय किए हैं, वह कभी मिला ही नहीं। नए छोड़िए, पुराने दाम भी आज तक नहीं मिले। प्रशासन के अधिकारियों को सब मालूम है लेकिन वो पूरी तरह से भ्रष्ट हैं, इसलिए कार्रवाई करने से डरते हैं। दोनों की मिलीभगत की वजह से कैब चालकों का जीना मुश्किल हो चुका है। पेट्रोल, डीजल और सीएनजी के दाम कई गुना बढ़ चुके हैं लेकिन हमारी आमदनी लगातार घट रही है। - मुकेश राजपूत, अध्यक्ष, कोसवा
प्रशासन ने जो दाम तय किए हैं, वो अधिकतम हैं। कैब कंपनियां उन दामों से ज्यादा चार्ज नहीं कर सकती। अगर कंपनियां कम दाम पर अच्छी सेवा दे रही हैं तो इसमें लोगों का तो फायदा ही है। ये हड़ताल कर सकते हैं, वो उनका अधिकार है। - धर्मपाल, सलाहकार, यूटी प्रशासक