पंजाब और हरियाणा के मुकाबले भारी-भरकम टैक्स चंडीगढ़ के उद्योग और व्यापार को तबाह कर रहा है। उद्यमी और व्यापारी चंडीगढ़ से पलायन कर रहे हैं। चंडीगढ़ के व्यापारियों की माने तो पंचकूला और मोहाली में सस्ते के चक्कर में खरीदार शिफ्ट हो रहे हैं, जिसकी वजह से व्यापारियों का बिजनेस चौपट हो रहा है।
टिंबर का बिजनेस तो पहले ही तीस फीसदी रह गया है, जबकि सस्ते जूते और चप्पलों (पांच सौ रुपये से कम) का कारोबार भी पंचकूला की ओर जा रहा है। चंडीगढ़ में जूते और चप्पलों पर साढ़े बारह फीसदी का टैक्स लगता है, जबकि हरियाणा में यह शून्य है।
इसी तरह खिलौने भी हरियाणा (पंचकूला) में वैट से मुक्त हैं। व्यापारी रामकरण गुप्ता ने कहा कि वैट की वजह से ग्राहक टिंबर और कंबल के साथ दालों की खरीदारी मोहाली से ज्यादा करते हैं।
उद्योग---------चंडीगढ़---------पंजाब--------हरियाणा
टिंबर-----------12.5---------5.00----------5.00
कंबल-----------5.00-----------0-----------0
जूते/चप्पल------12.5---------12.5----------0
खिलौने----------5.00--------5.00---------0
एक हजार छोटे व्यापारी बेहाल
मनीमाजरा के एक हजार छोटे व्यापारी अनापत्ति प्रमाणपत्र को लेकर काफी परेशान हैं। यह कोई विकसित मार्केट नहीं है। यहां घरों को ही दुकानों में तब्दील कर दिया गया है। इन व्यापारियों को नगर निगम से अनापत्ति प्रमाणपत्र लाने के लिए कहा जाता है। व्यापारियों को यह प्रमाणपत्र नहीं मिलता। चंडीगढ़ व्यापार मंडल ने इस मामले को लेकर चंडीगढ़ के गृह सचिव से मुलाकात की है। व्यापारियों का कहना है कि नो आब्जेक्शन सर्टिफिकेट की औपचारिकता से मनीमाजरा के व्यापारियों को छूट दी जानी चाहिए।
कोट्स
टैक्स की समानता की मांग केंद्र सरकार से पहले से की जाती रही है। अब चंडीगढ़ प्रशासन के माध्यम से नई सरकार को एक बार फिर इस संबंध में मेमोरेंडम सौंपा जाएगा।
-चरंजीव सिंह, अध्यक्ष, व्यापार मंडल, चंडीगढ़