बंकर इतने छोटे थे कि वहां पांच सौ से छह सौ छात्रों को रखा गया। वहां बैठने की भी जगह नहीं थी। इसी दौरान सूचना मिली कि सभी किसी तरह से सीमा पर पहुंचे। किसी तरह से रात काटी और कुछ साथियों ने पोलैंड सीमा तक बस किराये पर ली।
50 किलोमीटर पहले उतारा और वहां से पैदल पहुंचे
तनुश्री ने बताया कि पोलैंड सीमा जाते समय बस चालक ने उन्हें 50 किलोमीटर पहले ही उतार दिया। जिस समय बस चालक ने उतारा तापमान माइनस तीन से पांच डिग्री था। वहां से पांच सहेलियां रात दो बजे ही पोलैंड सीमा के लिए पैदल ही निकल गईं। तनुश्री ने कहा कि रास्ते में न तो उन्हें पानी मिला और न ही कुछ खाने को। ऊपर से ठंड इतना ज्यादा थी कि बुरा हाल हो रहा था।
लगातार 15 घंटे चलने के बाद वह मैदुका बार्डर पर यूक्रेन चेकपोस्ट पर पहुंचे। वहां उन्हें आगे जाने की इजाजत नहीं मिली तो वहीं बैठ गए। उनके साथ मारपीट की गई और जब विरोध कर चिल्लाते तो उन पर बंदूक तान दी जाती थी। लग रहा था कि अब भारत नहीं पहुंच पाएंगे। इसी दौरान सूचना मिली कि बार्डर खुलने वाला है तो पचास-पचास के ग्रुप बनाकर उन्हें मैदुका में एंट्री मिली।
अफ्रीकन लड़कों ने रास्ते में की बदतमीजी
तनुश्री ने बताया कि मैदुका में एंट्री करने के दो किलोमीटर बाद पैदल चलने पर उन्हें लाइन में खड़ा होना पड़ा। इस दौरान अफ्रीकन लड़कों ने उनके साथ काफी बदतमीजी की, उन्हें पीटा भी गया। छह से आठ घंटे लाइन में खड़े रहने के बाद उन्हें यूक्रेन से बाहर निकलने का मौका मिला। 27 फरवरी को उन्हें इमीग्रेशन की जरूरत थी तो वह दफ्तर के बाहर बैठे रहे। वहां स्थानीय युवकों ने भी उनके साथ दुर्व्यवहार किया। आखिर 28 को उन्हें पोलैंड में एंट्री मिली।
पोलैंड में भारतीय अधिकारियों ने संभाला और दिया खाना
तनुश्री ने बताया कि 50 किलोमीटर चलने, ठंड में दो रात बाहर गुजारने और लड़कों की बदतमीजी सहने के बाद पोलैंड में अधिकारियों ने उन्हें संभाला। वहां उन्हें खाने के लिए दिया गया और दवाएं दी गईं। इसके बाद वहां से उन्हें फ्लाइट में बैठाया गया और वहां से इस्तांबुल और वहां से फिर दिल्ली पहुंचे। अब दिल्ली से वह बुआ के घर पहुंची हैं।
बुआ के घर पहुंचते ही सबसे पहले किया पिता को फोन
तनुश्री के पिता भारतीय सेना में सूबेदार हैं। वह पुणे में तैनात थे और तनुश्री की मां भी उन्हीं के साथ पुणे में रह रही थीं। कुछ समय पहले तनुश्री के पिता राजकुमार की लाहौल स्पीति में तैनाती हुई है। लुधियाना बुआ के घर पहुंचते ही तनुश्री ने सबसे पहले अपने पिता से बात की और सारी बात बताई। इसके बाद मां पुणे से लुधियाना के लिए बेटी से मिलने के लिए निकल गईं।