उधर, इंटक नेता प्रदीप बूरा ने भी विभाग के फैसले का विरोध किया है। तालमेल कमेटी के नेताओं ने कहा कि चालक-परिचालकों की भर्ती किए बिना ओवरटाइम समाप्त करने से पहले ही परिवहन व्यवस्था पूरी तरह से गड़बड़ा चुकी है। जबकि तालमेल कमेटी ने 45 दिन के लिए ओवरटाइम का लाभ लिए बिना पूरी ड्यूटी करने के बारे में सरकार व महानिदेशक को पत्र लिख चुकी है, मगर कर्मचारियों के सुझाव को मानने की बजाय ग्रामीण क्षेत्रों में बसों का रात्रि ठहराव बंद कर परिवहन विभाग ने एक ओर तुगलकी फरमान जारी किया है।
सरकार ने अपने चहेते लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए 700 प्राइवेट बसें ठेके पर लेने के लिए यह निर्णय लिया है। ओवरटाइम समाप्त करने के बहाने परिवहन सेवा कम कर एवं बसों का रात्रि ठहराव बंद कर विभाग ने सरकार की छवि धूमिल करने का एक और प्रयास किया है। उन्होंने कहा कि जनहित के मुद्दों, विभाग में सरकारी बसें बढ़ाने एवं स्थायी भर्ती करने की मांग को लेकर एक बार फिर रोडवेज कर्मचारी आंदोलन करेंगे।