चंडीगढ़ नगर निगम में नियमों को ताक पर रखकर भर्ती किए गए 75 अस्थायी कर्मचारियों को स्थायी करने के लिए 30 सितंबर को टेबल एजेंडा लाया जा रहा है। सूची में ज्यादातर कर्मचारी ऐसे हैं, जिन्हें सिर्फ कुछ माह के लिए कॉन्ट्रैक्ट पर रखा गया था। इस पर निगम के अधिकारियों ने ध्यान नहीं दिया और कर्मचारी लगातार काम करते रहे।
हैरानी की बात यह है कि ज्यादातर कर्मचारी 2006 के बाद भर्ती हुए हैं, बावजूद इसके स्थायी करने के लिए एजेंडा लाया जा रहा है। नगर निगम में 30 सितंबर को महत्वपूर्ण बैठक होने जा रही है। बैठक में 75 अस्थायी कर्मचारियों को स्थायी करने समेत पांच एजेंडों पर चर्चा होगी। 2006 में एक नियम बनाया गया था कि 1996 से 2006 तक के सभी ऐसे कर्मचारी जो सरकारी नियमों को पूरा करते हों, उन्हें तत्काल प्रभाव से स्थायी कर दिया जाए।
उसके बाद अस्थायी भर्ती किसी भी कर्मचारी को स्थायी नहीं किया जा सकेगा। जिन 75 लोगों की सूची एजेंडा में लाई जा रही है, ज्यादातर 2006 के बाद भर्ती हुए हैं। इसके अलावा ज्यादातर कर्मचारियों को कुछ समय केलिए अस्थायी तौर पर निगम में रखा गया था, लेकिन अधिकारियों की मिलीभगत कहें या लापरवाही, उन्हें लगातार निगम में कार्यरत रखा गया और फिर स्थायी करने के लिए एजेंडा लाया जा रहा है।
छह महीने के लिए किया था भर्ती, अब तक टिके
सूची में ज्यादातर कर्मचारी केवल कुछ ही महीने के लिए निगम में काम पर रखे गए थे, जो अब तक लगातार सेवा में बने हुए हैं। एक कर्मचारी 2008 में मात्र छह महीने के लिए नगर निगम में अस्थायी तौर पर काम पर रखा गया था। वर्तमान में उसे स्थायी करने के लिए एजेंडा लाया जा रहा है। हैरानी की बात यह है इंटरव्यू में उसे मात्र 10 में से 3 अंक मिले थे।
इसी तरह ठेकेदार के अंतर्गत आउटसोर्स पर कर्मचारी अब तक निगम में काम कर रहा है, जबकि कंपनी का टेंडर खत्म हुए कई साल हो गए हैं। कर्मचारी को नौकरी पर लगातार रखने का कारण पूछा गया तो अधिकारी ने बताया कि बेहतर काम करता था, इसलिए कर्मचारी को अस्थायी रूप से रख लिया गया। यह तो मात्र दो उदाहरण है, ज्यादातर लिस्ट में लिखे गए नाम भी इसी तरह हैं।
2010 में एसई पब्लिक हेल्थ ने अपने स्तर पर लगाए कर्मचारी
2010 में तत्कालीन एसई ने अपने स्तर पर ही विज्ञापन निकालकर पांच क्लर्क की भर्ती कर दी। इसकी अनुमति के लिए तत्कालीन कमिश्नर के पास जब मामला आया तो तो उन्होंने एसई से जानकारी मांगी कि किस स्तर यह भर्तियां की गईं हैं। इस पर एसई ने बताया कि अपने ही स्तर पर विज्ञापन निकालकर भर्तियां कर ली गईं हैं। उसके बाद क्लर्क को अस्थायी रूप से निगम में नौकरी दे दी गई। अब उन्हीं पांचों के नाम भी कर्मचारियों को स्थायी करने वाली सूची में रखा गया है।
2012 में कांग्रेस के समय भी लाया गया था एजेंडा
साल 2012 में भी कर्मचारियों को स्थायी करने के लिए एजेंडा लाया गया था। इस दौरान एक कमेटी ने इसकी रिपोर्ट भी दी थी। उसके बाद तत्कालीन मेयर ने रिपोर्ट देखने के बाद एक और कमेटी बना दी। कमेटी ने रिपोर्ट प्रस्तुत की तो तत्कालीन निगम कमिश्नर ने कर्मचारियों को स्थायी करने पर रोक लगा दी। कहा कि 2006 केनियमों के अनुसार कर्मचारियों को नियमित नहीं किया जा सकता।
इन एजेंडों पर भी रहेगी नजर
नगर निगम वर्तमान में अपनी कमाई का 90 प्रतिशत भाग अधिकारियों और कर्मचारियों की सैलरी पर खर्च करता है। फंड की कमी से जूझ रहे नगर निगम ने री-स्ट्रक्चरिंग करने की तैयारी की है। कहां कितने स्टाफ की जरूरत है, उनका काम क्या है और अतिरिक्त लोगों का कैसे उपयोग किया जाए। इसके लिए सदन की बैठक में कर्मचारियों की री-स्ट्रक्चरिंग का एजेंडा लाया गया था।
वहीं, इंजीनियरिंग विंग की पोस्टों को सर्विस रेग्यूलेशन 2012 के अंतर्गत करने का एजेंडा लाया गया था। इस पर अरुण सूद ने कहा कि था कि यह एजेंडा 24 घंटे पहले मिला है, इसलिए इसे आगे बढ़ा दिया जाए। हालांकि, देवेश मोदगिल ने कहा था कि मैं पूरी तैयारी केसाथ आया हूं। आखिरकार काफी बहस केबाद 30 सितंबर को बैठक में दोनों मुद्दों पर चर्चा करने केलिए कहा गया था। डोर-टु-डोर कचरा कलेक्शन व टॉयलेट केलिए एमओयू को लेकर भी चर्चा होगी।
एजेंडा लाया जा रहा है। इसके लिए सभी कर्मचारियों की सूची भी मिल गई है। सभी के दस्तावेज भी चेक किए जा रहे हैं, जो भी व्यक्ति स्थायी होगा, नियमानुसार ही किया जाएगा।
- केके यादव, नगर निगम कमिश्नर