एसवाईएल पर मचे सियासी घमासान के बीच हरियाणा सरकार ने पंजाब और दिल्ली के मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है। इसके तहत सरकार ने अपनी मंशा जाहिर कर दी है। कृषि मंत्री ओम प्रकाश धनखड़ ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को पत्र लिखकर साफ कर दिया है कि उनके विवादास्पद बयान के बाद नहरी प्रणाली से दिल्ली को पानी देने में हरियाणा असमर्थ है।
धनखड़ ने कहा है कि केजरीवाल नंगल डैम से दिल्ली तक अलग नहर की खुदाई करवा लें। नंगल डैम से रावी ब्यास के पानी में हरियाणा को 3.5 एमएएफ और दिल्ली को 0.2 एमएएफ पानी आवंटित किया गया था।
हरियाणा दिल्ली का 0.2 एमएएफ पानी भाखड़ा मेन लाइन नहर से लेकर आता है, जो हरियाणा की नरवाना ब्रांच, पश्चिमी यमुना नहर प्रणाली के माध्यम से हरियाणा से होता हुआ दिल्ली पहुंचता है।
दिल्ली के लिए उठाए गए इस बोझ के कारण हरियाणा अपना 496 क्यूसेक पानी नहीं ले पाता है। इसके अलावा यमुना का 330 क्यूसेक पानी भी पश्चिम यमुना नहर प्रणाली के माध्यम से हरियाणा दिल्ली को पहुंचाता है।
धनखड़ ने बताया कि रावी ब्यास में नंगल डैम से हरियाणा व दिल्ली का पानी तो उपलब्ध है, लेकिन इस पानी को लोने का साधन उपलब्ध नहीं है।
धनखड़ के मुताबिक केजरीवाल ने हमारे एकमात्र संभावित साधन एसवाईएल नहर का पंजाब में अपने राजनीतिक स्वार्थ केलिए विरोध कर दिया है। ऐसा करने के कारण केजरीवाल दिल्ली के मुख्यमंत्री होते हुए भी दिल्ली के लोगों के हितों के खिलाफ खड़े हो गए हैं।
बादल से मांगा 35 हजार 20 करोड़ मुआवजा : हरियाणा के कृषि मंत्री ओम प्रकाश धनखड़ ने पंजाब के सीएम प्रकाश सिंह बादल से कहा है कि हर साल हरियाणा का किसानों का एक हजार करोड़ का नुकसान हो रहा है। इसके हिसाब से 35 हजार करोड़ मुआवजे के बनेंगे। इसके अलावा 20 करोड़ रुपये पंजाब के लगाए अड़ंगाें के कारण मुकदमेबाजी में खर्च हुए हैं। लिहाजा मुआवजा देना उनके लिए इतना आसान नहीं होगा।