पंजाब यूनिवर्सिटी का संचालन 14 सितंबर के बाद बदल सकता है। अब पीयू में बोर्ड ऑफ गवर्नेंस का राज होगा। सीनेट की व्यवस्था खत्म किए जाने की तैयारी हो रही है। इसके लिए विशेष आदेश नहीं आ रहे हैं, लेकिन नई शिक्षा नीति के मुताबिक स्वत: ही पुरानी व्यवस्थाएं खत्म हो जाएगी। इससे सीनेट के सदस्यों में हड़कंप मचा हुआ है। उन लोगों को भी झटका लगेगा जो चुनाव जीतकर सीनेट तक पहुंचने की इच्छा रखते हैं।
चांसलर कार्यालय की ओर से नामित होने वाले मनोनीत सदस्य कर बोर्ड ऑफ गवर्नेंस का संचालन करेंगे। नई शिक्षा नीति को 14 सितंबर से शुरू होने जा रहे लोकसभा व राज्यसभा सत्र में पेश किया जाएगा और वहां से मंजूरी मिलेगी। जानकारों का कहना है कि लोकसभा व राज्यसभा में भाजपा का बहुमत है। ऐसे में नीति को लेकर विरोध तो होगा, लेकिन इस पर मुहर लगता तय है।
क्या कहती है नई शिक्षा नीति
नई शिक्षा नीति कहती है कि केंद्र व राज्यों के शिक्षण संस्थानों का संचालन जिन माध्यमों से अब तक होता आया है वह खत्म हो जाएगा। उसकी जगह बोर्ड ऑफ गवर्नेंस ले लेगा। इसमें चुनिंदा सदस्य होंगे। यह सदस्य चांसलर कार्यालय या वीसी की ओर से नामित हो सकते हैं। इनका कार्यकाल कितने दिन का होगा? यह तय किया जाना बाकी है। सूत्रों का कहना है कि पीयू का संचालन सीनेट व सिंडिकेट के माध्यम से होता आया है। ऐसे में इन दोनों सदनों का कार्य बोर्ड ऑफ गवर्नेंस करेगी।
नहीं पड़ेगी चुनाव की आवश्यकता
सूत्रों का कहना है कि जब बोर्ड ऑफ गवर्नेंस पीयू में लागू हो जाएगा तो सीनेट व सिंडिकेट के चुनाव की आवश्यकता नहीं होगी। ऐसे में वर्षों से चली आ रही व्यवस्था खत्म हो जाएगी। हालांकि तमाम लोग सीनेट व सिंडिकेट को खत्म करने की व्यवस्था के विरोध में हैं। उनका तर्क है कि इससे पीयू को बड़ा नुकसान होगा। मनमानी बढ़ जाएगी।
क्या पंजाब सरकार की अनुमति लेना जरूरी होगा
पीयू की सीनेट में पंजाब सरकार के चार विधायक चुनकर पहुंचते हैं। यह पीयू कैलेंडर के मुताबिक ही है। अब सवाल उठता है कि क्या बिना पंजाब सरकार की अनुमति के विधायकों का दखल पीयू के सदन में खत्म हो जाएगा। या बिना अनुमति के बोर्ड ऑफ गवर्नेंस शामिल कर दिया जाएगा या बोर्ड में इन विधायकों को जगह दी जाएगी। पीयू कैलेंडर में कितना बदलाव होगा और कैसे? यह सभी सवाल खड़े हुए हैं। इनका उत्तर आना अभी बाकी है।