पंजाब सरकार द्वारा सूबे की पंचायतें भंग करने के मामले में दो सीनियर आईएएस अधिकारियों के निलंबन से अफसरशाही और सरकार के बीच फिर से टकराव के हालात पैदा हो गए हैं। प्रदेश की आईएएस लॉबी ने पंचायत विभाग में तैनात 1994 बैच के आईएएस अधिकारी धीरेंद्र कुमार तिवारी और 2009 बैच के आईएएस गुरप्रीत सिंह खैरा को निलंबित किए जाने पर नाराजगी जताई है। दोनों अधिकारियों को सरकार ने इस आधार पर निलंबित कर दिया है कि दोनों ने ही राज्य सरकार को समयपूर्व पंचायतें भंग करने को कहा था।
इस पूरे घटनाक्रम पर आईएएस अधिकारियों का कहना है कि कोई भी शासकीय फैसला मुख्यमंत्री या मंत्री के आदेश के बिना नहीं होता और अधिकारियों को आदेश का पालन करना पड़ता है अन्यथा तबादले जैसे आदेश झेलने पड़ते हैं। शुक्रवार को प्रदेश सरकार के चार आईएएस अधिकारियों से जब इस संबंध में विचार जानने चाहे तो उन्होंने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि दोनों अधिकारियों के निलंबन के आदेश पूरी तरह गलत हैं क्योंकि पंचायतें भंग करने जैसा नीतिगत फैसला अधिकारी अपने स्तर पर नहीं ले सकते। ऐसे आदेश तैयार करने के लिए मुख्यमंत्री या संबंधित मंत्री द्वारा ही कहा जाता है।
यह भी पढ़ें: पंजाब का नया दर्द: कॉन्ट्रैक्ट मैरिज में लुट रही जवानी, विदेश जाने की चाह में... न खुदा ही मिला न विसाल-ए-सनम
सोमवार को डेनमार्क से लौटेंगे धीरेंद्र तिवारी
एक अधिकारी ने बताया कि निलंबित किए गए धीरेंद्र कुमार तिवारी इन दिनों डेनमार्क में ट्रेनिंग के लिए गए हुए हैं और वह सोमवार को चंडीगढ़ लौटेंगे। उनके लौटने के बाद आईएएस अधिकारियों का संगठन इस पूरे मामले में आगे की कार्रवाई का फैसला लेगा। सरकार को इस फैसले के लिए अवश्य ही चेताया जाएगा क्योंकि ऐसे माहौल में कोई भी अधिकारी कार्य करने में असमर्थ होगा।
सवा साल में दूसरी बार टकराव
गौरतलब है कि पंजाब में आम आदमी पार्टी (आप) की सरकार बनने के बाद सवा साल के दौरान यह दूसरी बार है जब अफसरशाही और सरकार के बीच टकराव के हालात बन गए हैं। इससे पहले इसी साल जनवरी में पीसीएस अधिकारी और सरकार उस समय आमने-सामने आ गए थे जब राज्य विजिलेंस ब्यूरो ने भ्रष्टाचार के मामलों में पीसीएस और आईएएस अधिकारियों के खिलाफ छापे मारे थे और उनकी गिरफ्तारी शुरू कर दी थी।
सरकार की इस कार्रवाई के नाराज पीसीएस अधिकारियों ने सामूहिक हड़ताल पर जाने का एलान किया तो मुख्यमंत्री ने इस बार की तरह कड़ा रुख अपनाते हुए एस्मा जैसी कार्रवाई की चेतावनी दी, जिसमें पीसीएस अधिकारियों के सेवाकाल में प्रमोशन आदि में कठिनाई पैदा हो जाती। इस तरह दबाव बनाकर मुख्यमंत्री ने पीसीएस अधिकारियों की हड़ताल को समाप्त कराया था। अब पटवारी-कानूनगो और डीसी दफ्तरों के मुलाजिम हड़ताल पर आमादा हैं और राज्य सरकार ने एस्मा लागू कर दिया है।