रिपोर्ट के अनुसार, देश में लक्षदीप के बाद सबसे कम क्षेत्र में भूमिगत जल का रीचार्ज चंडीगढ़ में होता है। लक्षदीप में सभी स्रोतों से 26.21 स्क्वायर मीटर क्षेत्र में भूमिगत जल का रिचार्ज होता है। वहीं, चंडीगढ़ में सभी स्रोतों में 114 स्क्वायर मीटर क्षेत्र में भूमिगत जल का रिचार्ज होता है। मानसून में बारिश से एक करोड़ क्यूबिक मीटर (बीसीएम) और अन्य स्रोतों से 0.02 बीएसएम पानी भूमि में गया। वहीं, अन्य दिनों में बारिश से 50 लाख क्यूबिक मीटर (बीसीएम) और अन्य स्रोतों से तीन करोड़ क्यूबिक मीटर पानी भूमि में जाता है। हर साल सिंचाई में एक करोड़ क्यूबिक मीटर, इंडस्ट्री में 20 लाख क्यूबिक मीटर, घरेलू कार्यों में तीन करोड़ क्यूबिक मीटर पानी का दोहन कर लेते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 2017 से 2020 तक चंडीगढ़ ने भूमिगत जलस्तर को बढ़ाने के लिए कोई कदम नहीं उठाए। इस कारण मात्र एक नंबर दिया गया है।
चंडीगढ़ महज कागजों में उठा सका कदम
भूजल बढ़ाने के लिए अधिकारी महज कागजों में ही काम करते हैं। एनजीटी की फटकार के बाद निगम ने कैंबवाला, सारंगपुर और खुड्डा अलीशेर और प्रशासन मलोया, धनास गांव और कैंबवाला के दूसरे तालाब गोद लेना का फैसला किया है। वर्ष 2019 में जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने देश के 254 जिलों की सूची जारी कर बताया था कि इन शहरों में भूजल स्तर तेजी से गिर रहा है। सूची में चंडीगढ़ का भी नाम शामिल था। उसके बाद निगम ने खुड्डा अलीशेर का पक्का तालाब और प्रशासन ने सेक्टर- 43 की झील को गोद लिया था, जो महज खानापूर्ति ही रही।
योजना बनी नहीं, बारिश का पानी भी बहा दिया
पंजाब विश्वविद्यालय के भूजल विशेषज्ञ विनोद के चौधरी ने बताया कि अधिकारियों के पास भूमिगत जल को बढ़ाने की कोई योजना ही नहीं है। शहर के एक सेक्टर में हुई बारिश को बचा लिया जाए तो पूरे साल शहर को पानी दिया जा सकता है, लेकिन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम खानापूर्ति के लिए लगे हैं। देखरेख के अभाव में उनमें पानी तक नहीं जाता है। गिरते भूजल से पानी में रसायन की मात्रा बढ़ रही है, जिससे बीमारियां बढ़ रहीं हैं।
चंडीगढ़ का जलस्तर काफी बेहतर है। यह रिपोर्ट कब बनी है, यह देखना होगा। वर्तमान में ऐसी कोई शिकायत नहीं आई है। फिर भी एक बार जानकारी ले ली जाएगी। -धर्मपाल, सलहाकर, यूटी प्रशासन
मनीमाजरा और शहर में 24 घंटे पानी की आपूर्ति के लिए तैयारी शुरू हो गई है। फेज के अनुसार ट्यूबवेल को हटाया जाएगा। एसटीपी अपग्रेड होने के बाद काफी मात्रा में टर्शरी वाटर आएगा, इसका लाभ शहर को मिलेगा और भूमिगत जल के दोहन में कमी आएगी। - आनिंदिता मित्रा, आयुक्त, नगर निगम