होशियारपुर में मामले की पैरवी कर रहे बादल के वकील हरजोत कमल सिंह ने इस संबंध में बताया कि सुप्रीम कोर्ट में उनके पक्ष के वकीलों ने अदालत के समक्ष तर्क दिया कि धार्मिक होना धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांतों के विपरीत नहीं है और केवल इसलिए कि एक राजनीतिक संगठन गुरुद्वारा समिति के लिए चुनाव लड़ रहा है इसका मतलब यह नहीं होता कि दल धर्मनिरपेक्ष नहीं है। इसलिए चुनाव आयोग और जीईसी के समक्ष दायर पार्टी के संविधान पर जालसाजी और धोखाधड़ी के आरोप पर आपराधिक मामले का कोई आधार नहीं है।
न्यायमूर्ति एस. अब्दुल नजीर और न्यायमूर्ति वी. रामसुब्रमण्यम की खंडपीठ ने आपराधिक मामले के खिलाफ याचिकाओं को खारिज करने को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए नोटिस जारी किया और अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट होशियारपुर के समक्ष आपराधिक शिकायत की कार्रवाई पर रोक लगा दी।
सुखबीर सिंह बादल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आर एस चीमा पेश हुए। प्रकाश सिंह बादल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता के वी विश्वनाथन पेश हुए जबकि दलजीत सिंह चीमा की ओर से अधिवक्ता संदीप कपूर पेश हुए। शिकायतकर्ता खेड़ा की ओर से इंदिरा उन्नीनार, एडवोकेट उपस्थित हुईं। शिकायतकर्ता बलवंत सिंह खेड़ा की ओर से पेश अधिवक्ता इंदिरा उन्नीनायर ने अदालत से अनुरोध किया कि उन्हें संक्षिप्त दलीलें देने की अनुमति दी जाए। हालांकि, न्यायालय ने निर्देश दिया कि वह अपना जवाब दाखिल कर सकती हैं और उस पर बाद में सुनवाई होगी।
न्यायालय ने प्रतिवादियों को नोटिस जारी करते हुए शिरोमणि के दोहरे संविधान के विवाद में सुखबीर सिंह बादल, प्रकाश सिंह बादल और दलजीत सिंह चीमा के खिलाफ दर्ज जालसाजी और धोखाधड़ी के मामले में पंजाब की होशियारपुर अदालत के समक्ष लंबित कार्रवाई पर रोक लगा दी है।