सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को शिरोमणि अकाली दल के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया द्वारा दायर उस याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया, जिसमें उनके खिलाफ नशा तस्करी में दर्ज मामलों को रद्द करने की मांग की गई थी।
न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति सूर्यकांत की पीठ ने मजीठिया से राहत के लिए पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय का रुख करने को कहा। शीर्ष अदालत ने कहा कि हम अनुच्छेद 32 के तहत याचिका पर विचार करने के इच्छुक नहीं हैं। लेकिन हम याचिकाकर्ता को उच्च न्यायालय या किसी अन्य पीठ से संपर्क करने की अनुमति देते हैं। हम निर्देश देते हैं कि याचिका की सुनवाई केवल उच्च न्यायालय की खंडपीठ द्वारा की जाए, न कि एकल पीठ द्वारा।
शीर्ष अदालत ने 31 जनवरी को मजीठिया को अमृतसर पूर्व विधानसभा क्षेत्र से शिअद उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने के लिए 20 फरवरी को विधानसभा चुनाव के मद्देनजर 23 फरवरी तक गिरफ्तारी से सुरक्षा प्रदान की थी। सुरक्षा अवधि समाप्त होने के बाद उन्होंने आत्मसमर्पण कर दिया था। पूर्व मंत्री मजीठिया का तर्क था कि ये मामले राजनीति से प्रेरित हैं और उनकी जांच पहले ही उच्च पदस्थ पुलिस अधिकारियों द्वारा की जा चुकी है।
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कार्यभार संभालने के बाद 20 मार्च को पंजाब पुलिस को अपने पहले आदेश में मजीठिया के खिलाफ ड्रग्स मामले की जांच कर रहे चार सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) का पुनर्गठन किया था। पिछली एसआईटी तीन सदस्यीय टीम थी। 20 दिसंबर, 2021 को एनडीपीएस अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज प्राथमिकी के आधार पर मजीठिया के खिलाफ आरोपों की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया था।