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10 साल की बच्ची का गर्भपात नहीं कराया जाएगा, SC ने ठुकराई याचिका

Sat, 29 Jul 2017 09:55 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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बच्ची के साथ दुराचार किया
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सुप्रीम कोर्ट ने 32 हफ्ते की गर्भवती 10 वर्षीय रेप पीड़िता के गर्भ को गिराने की इजाजत देने से इनकार कर दिया है। पीजीआई, चंडीगढ़ के डॉक्टरों की टीम की रिपोर्ट के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने यह निर्णय लिया। इससे पहले चंडीगढ़ की जिला अदालत ने भी 18 जुलाई को गर्भपात की इजाजत देने से इनकार कर दिया था। वहीं, गर्भपात की इजाजत मांगने को लेकर बड़ी संख्या में दाखिल होने वाली याचिकाओं के मद्देनजर शीर्ष अदालत ने सॉलिसिटर जनरल से कहा कि क्यों नहीं ऐसे मामलों के लिए स्थायी मेडिकल बोर्ड का गठन किया जाए।
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चीफ जस्टिस जेएस खेहर और न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ ने मेडिकल बोर्ड की टीम की रिपोर्ट में पाया कि गर्भपात से नाबालिग और गर्भ में पल रहे बच्चे दोनों को खतरा है। इसके बाद पीठ ने गर्भपात की इजाजत मांगने वाली याचिका खारिज कर दी। पीठ ने बच्ची की डिलिवरी सुनिश्चित करने के लिए चिकित्सा में किसी तरह की कसर नहीं छोड़ने का निर्देश दिया है। पीठ ने नाबालिग की चंडीगढ़ के सेक्टर-32 स्थित अस्पताल में चल रही चिकित्सा पर संतोष व्यक्त किया है। 

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने विधिक सेवा प्राधिकरण, चंडीगढ़ के सदस्य सचिव को अमाइकस क्यूरी बनाते हुए उन्हें बुधवार को नाबालिग की मेडिकल जांच सुनिश्चित करने के लिए कहा था। मेडिकल टीम को इस बात की जांच करनी थी कि अगर गर्भपात की इजाजत दी जाती है तो इससे 10 वर्षीय नाबालिग और नवजात शिशु के स्थास्थ्य पर क्या प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है। साथ ही चीफ जस्टिस ने अदालत कक्ष में मौजूद सॉलिसिटर जनरल रंजीत कुमार से कहा कि आजकल सुप्रीम कोर्ट में इस तरह के कई मामले आ रहे हैं। ऐसे में क्यों नहीं हर जिले में स्थायी तौर पर मेडिकल बोर्ड का गठन किया जाए। वास्तव में चीफ जस्टिस का यह कहना था कि इस तरह के मामलों को सुप्रीम कोर्ट पहुंचने में अनावश्यक देरी होती है। 
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यह है मामला

minor girl rape
मालूम हो कि मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेगनेंसी एक्ट, 1971 के मौजूदा प्रावधान के मुताबिक, गर्भधारण के 20 हफ्ते के बाद गर्भपात की इजाजत नहीं दी जा सकती, लेकिन अधिनियम की धारा-पांच में यह प्रावधान है कि अगर गर्भ के कारण महिला की जान को खतरा हो तो 20 हफ्ते के बाद भी गर्भपात की इजाजत दी जा सकती है।

24 हफ्ते की गर्भवती महिला को मिली गर्भपात की इजाजत
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने 24 हफ्ते की गर्भवती महाराष्ट्र की 21 वर्षीय महिला को गर्भपात की इजाजत दे दी है। सुप्रीम कोर्ट ने यह निर्णय मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट देखने के बाद लिया। न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली दो सदस्यीय पीठ ने मुंबई के जेजे अस्पताल के डॉक्टरों की टीम की रिपोर्ट में पाया कि महिला के गर्भ में पल रहे बच्चे में न्यूरो और हृदय संबंधी परेशानी है। इस बात पर गौर करते हुए पीठ ने महिला को गर्भपात की इजाजत दे दी।

यह है मामला
13 जुलाई को 10 साल की बच्ची के पेट में दर्द होने पर परिजन उसे अस्पताल ले गए। वहां जांच के बाद पता चला कि बच्ची छह माह से अधिक की गर्भवती है। इसके बाद परिजनों ने इसकी सूचना पुलिस को दी। बच्ची ने बताया कि उसके मामा कुल बहादुर ने ही उसके साथ कई बार गलत काम किया है। पुलिस ने बच्ची की मेडिकल रिपोर्ट और मां की शिकायत के आधार पर आरोपी मामा को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। 
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