‘देश में काले धन पर रोक लगाने के नाम पर नोटबंदी करना सरकार का पूरी तरह बेवकूफी भरा फैसला है। मुझे समझ नहीं आता ऐसा सुझाव किसने दिया। आज 500 रुपये की कीमत 5 साल पहले 100 रुपये के बराबर है।’
यह बात कही सुप्रीम कोर्ट के रिटायर जस्टिस मार्कं डेय काटजू ने। वह बुधवार को पंजाब यूनिवर्सिटी के लॉ ऑडिटोरियम में स्टूडेंट वेलफेयर सोसाइटी की ओर से आयोजित ‘संवाद’ सेमिनार में मुख्य वक्ता के तौर पर पहुंचे। जस्टिस काटजू ने ‘भारत के मौजूदा हालात और लीगल सिस्टम ...थीम पर विचार रखे। हमेशा अपने बेबाक कमेंट्स से चर्चा में रहने वाले काटजू ने करीब डेढ़ घंटे तक पीयू स्टूडेंट्स के सवालों के जवाब दिए।
उन्होंने नोटबंदी पर कहा कि ‘इस फैसले से सिर्फ आम जनता को ही परेशानी हो रही है, बड़े पैसे वालों ने तो पहले ही विदेशों में सेटिंग कर ली है। छोटे दुकानदार और कामकाजी लोगों के पास काला धन नहीं होता।’ लोगों की परेशानी का जिक्र करते हुए काटजू ने कहा कि लोग अपने ही पैसे के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं। लोग बिस्तर लगाकर रात भर बैंकों के बाहर इंतजार कर रहे हैं।
जस्टिस काटजू ने कहा कि उन्हें देश के मौजूदा सिस्टम पर बिल्कुल भरोसा नहीं रहा। देश में धर्म और जाति के नाम पर खूब राजनीति हो रही है। यपी और बिहार को उन्होंने जातिवाद से ग्रस्त बताया। देश में तीन तलाक के सवाल पर कहा कि ‘यूनिफार्म सिविल कोड को बंद किया जाना चाहिए। तीन बार तलाक कहने भर से ऐसा नहीं हो सकता। यह एक गलत परंपरा है।’