कांग्रेस आलाकमान से नाराज चल रहे पंजाब कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष सुनील जाखड़ पर अब सस्पेंस खत्म हो गया है। जाखड़ ने 15 दिसंबर बुधवार को पंजाब चुनाव कैंपेन कमेटी की बैठक बुला ली है। बैठक में वह तय करेंगे कि 2022 के चुनावी रण में पंजाब कांग्रेस का कैंपेन क्या होगा। इस बैठक में मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और कांग्रेस प्रधान नवजोत सिंह सिद्धू भी शामिल होंगे।
पंजाब कांग्रेस में चल रहे वर्तमान हालातों को देखते हुए पार्टी के लिए चुनावी राह आसान नहीं दिख रही है। आए दिन कांग्रेस प्रधान नवजोत सिंह सिद्धू 2017 में किए गए वादों और वर्तमान में की जाने वाली घोषणाएं को लेकर सवाल खड़े करते रहते हैं। जिससे मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और सरकार के अन्य नेता खुद को असहज सा महसूस करते हैं। पंजाब में चल रही इस ऊहापोह की स्थिति से उबरने के लिए आलाकमान लगातार प्रयास कर रहा है। इसी क्रम में नाराज चल रहे पूर्व कांग्रेस प्रधान सुनील जाखड़ को मनाने के लिए 2022 में होने वाले चुनाव की अहम जिम्मेदारी दी गई है। उन्हें पार्टी आलाकमान ने कैंपेन कमेटी का चेयरमैन नियुक्त किया है।
इन दिनों के बिखरे चल रहे चुनाव प्रचार को संभालना जाखड़ के लिए टेढ़ी खीर होने वाला है। हालांकि इन सबके बीच उन्होंने कैंपेन कमेटी की पहली बैठक बुधवार को आहुत की है। जिसमें वह मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और कांग्रेस प्रधान नवजोत सिंह सिद्धू के साथ चर्चा कर यह तय करेंगे कि आने वाले चुनाव में प्रचार की दिशा क्या होगी।
इन चुनौतियों से उबरना होगा अहम
कमेटी के सामने 2017 की कुछ चुनौतियां भी आएंगी, जिनसे उबरना उनके लिए अहम होगा। घोषणा पत्र में शामिल घर-घर नौकरी, ड्रग्स को खत्म करने, किसानों की संपूर्ण कर्ज माफी, 2500 रुपये बेरोजगारी भत्ता जैसे वादे अभी पूरे नहीं हो पाए हैं। बेअदबी कांड को भी अभी तक कांग्रेस सुलझा नहीं पाई है। प्रचार के दौरान पार्टी को जनता के इन सवालों का जवाब देना बेहद चुनौती भरा होगा।