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Chandigarh News: हस्त नक्षत्र और प्रीति योग में सूर्य करेंगे वृश्चिक राशि में प्रवेश

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चंडीगढ़। हस्त नक्षत्र, प्रीति योग और रविवार के शुभ संयोग में 16 नवंबर को सूर्य देव वृश्चिक राशि में प्रवेश करेंगे। यह वृश्चिक संक्रांति कहलाती है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, यह संक्रांति व्यापारियों और विद्यार्थियों के लिए अत्यंत शुभकारक मानी जा रही है क्योंकि वृश्चिक राशि के स्वामी मंगल और सूर्य दोनों मित्र ग्रह हैं। श्री देवालय पूजक परिषद के संरक्षक व श्री खेड़ा शिव मंदिर सेक्टर-28 के पुजारी आचार्य ईश्वर चंद्र शास्त्री ने बताया कि इस दिन साधक नई आध्यात्मिक ऊर्जा और शक्ति का अनुभव करेंगे। सूर्य देव की आराधना से आत्मविश्वास, प्रतिष्ठा और करियर पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। उन्होंने कहा कि संक्रांति के दिन पवित्र नदियों और तीर्थों में स्नान, तर्पण और दान करने से पापों का नाश होता है और मन शुद्ध होता है।
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वृश्चिक संक्रांति का संक्रमण काल
आचार्य शास्त्री के अनुसार, सूर्य देव 16 नवंबर को दोपहर 1:36 बजे तुला राशि से निकलकर मंगल की राशि वृश्चिक में प्रवेश करेंगे। इस दिन पुण्य काल सुबह 7 बजे से दोपहर 1:45 बजे तक रहेगा। इसी अवधि में स्नान, दान, सूर्य अर्घ्य और पूजा-पाठ करने से अधिक पुण्य की प्राप्ति होती है।
संक्रांति पर ऐसे करें पूजा
श्री राधा कृष्ण मंदिर सेक्टर-18 के पुजारी और श्री देवालय पूजक परिषद के अध्यक्ष डॉ. लाल बहादुर दुबे ने बताया कि संक्रांति के दिन प्रातःकाल उठकर स्नान करें। यदि नदी या तालाब में स्नान संभव न हो तो गंगाजल मिले जल से घर पर स्नान करें। इसके बाद स्वच्छ वस्त्र पहनकर तांबे के पात्र में जल, लाल चंदन, लाल फूल और गुड़ मिलाकर सूर्य देव को अर्घ्य दें। अर्घ्य देते समय ओम सूर्याय नमः या ओम घृणि सूर्याय नमः मंत्र का जाप करें। फिर सूर्य देव की धूप, दीप, लाल चंदन और आदित्य हृदय स्तोत्र से पूजा करें। आम या अर्क की लकड़ी से हवन करें, सूर्य नमस्कार करें और शहद, गुड़, गेहूं, लाल फल एवं लाल वस्त्र का दान करें। अंत में गाय को गुड़-रोटी खिलाएं, माता-पिता और बुजुर्गों का आशीर्वाद लें। ऐसा करने से शरीर स्वस्थ रहता है और सूर्य देव की कृपा बनी रहती है।
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