सुखपाल खैरा और सुच्चा सिंह छोटेपुर
आम आदमी पार्टी ने अपने पूर्व सूबा कन्वीनर सुच्चा सिंह छोटेपुर के लिए दरवाजे बंद कर दिए। वहीं, पंजाबी एकता पार्टी के प्रधान सुखपाल खैरा ने उन्हें अपने साथ लाने की कवायद शुरू की है। खैरा ने छोटेपुर से मुलाकात की। आप से बगावत के बाद खैरा को मिल रहे जन समर्थन को देखते हुए पार्टी ने छोटेपुर को वापस लाने की योजना बनाई थी।
पार्टी सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट कर छोटेपुर और डॉ. धरमवीर गांधी से पार्टी में लौटने की अपील की थी। एक इंटरव्यू में भी उन्होंने छोटेपुर से लौटने की अपील की थी। साथ ही पंजाब इकाई को उनसे बातचीत शुरू करने के निर्देश दिए थे। पंजाब के नेताओं की छोटेपुर के साथ कुछ बैठकें भी हुईं, लेकिन नतीजा नहीं निकल सका। सूत्र बताते हैं कि छोटेपुर ने पार्टी में वापसी के लिए बहुत ही सख्त शर्तें रख दी थीं।
उनकी पहली शर्त थी कि केजरीवाल खुद उनके घर आकर उनसे माफी मांगे। जबकि, दूसरी शर्त यह थी कि सूबा प्रधान बनाए जाने के बाद वह मौजूदा सारा संगठनात्मक ढांचा भंग कर देंगे। नए सिरे से अपना संगठन खड़ा करेंगे। प्रदेश से लेकर राष्ट्रीय नेतृत्व इसके लिए तैयार नहीं हुआ। काफी समय तक छोटेपुर को मनाने की कोशिश चली, लेकिन वह टस से मस नहीं हुए। जिसके बाद हाईकमान ने यह चैप्टर बंद करके भगवंत मान को दोबारा प्रधान बनाने का फैसला किया।
गौरतलब है कि चुनाव के दौरान आप नेतृत्व ने छोटेपुर पर वॉलंटियर्स से पैसे लेने का आरोप लगाकर उन्हें निकाला था। जबकि, वह स्टिंग की सीडी कभी भी सार्वजनिक नहीं की गई। खैरा से मुलाकात के बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि छोटेपुर की आपणा पंजाब पार्टी उनके गठबंधन में शामिल हो सकती है।
दस्तखत कर गलती की - खैरा
सुखपाल खैरा ने मीडिया से बातचीत में कहा कि सुच्चा सिंह छोटेपुर भी भ्रष्ट सिस्टम के खिलाफ लड़ रहे हैं। उन पर गलत आरोप लगा कर आप ने निकाला था, अब तक उसके सबूत नहीं दिए। छोटेपुर ने 2014 में केजरीवाल को 80 लाख रुपये देने की बात कही थी, उस पर भी आप नेतृत्व मौन है। जब उनसे पूछा गया कि छोटेपुर को निकालने वाले पत्र पर उनके दस्तखत भी थे तो खैरा ने कहा कि उनसे गलती हो गई थी। हालांकि उन्होंने उस समय और बाद में भी इस पर विरोध जताया था।