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इस्तीफा देने के बाद भी 'आप' के लिए सिरदर्दी बने सुखपाल खैरा, पार्टी को होंगे दो बड़े नुकसान

Mon, 07 Jan 2019 12:25 PM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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सुखपाल खैरा
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सुखपाल खैरा ने आम आदमी पार्टी से इस्तीफा दे दिया। इसके बावजूद वे पार्टी के लिए सिरदर्दी बन गए हैं, क्योंकि 'आप' को दो बड़े नुकसान उठान होंगे।
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खैरा बनाएंगे पार्टी, चुनाव में कड़ी टक्कर देंगे
इस्तीफा दे दिया, अब सुखपाल खैरा जल्द ही नई सियासी पार्टी का एलान करेंगे। इसके लिए पूरी तैयारियां हो चुकी हैं। काफी हद तक पार्टी का संगठनात्मक ढांचा भी लगभग तैयार है। क्योंकि 'आप' में रहते हुए ही खैरा ने अपना समानांतर संगठन बनाने का एलान किया था। वही लोग नई पार्टी का भी हिस्सा होंगे, जो उनके साथ नजर आए थे। खैरा के साथ 'आप' के छह विधायक और हैं।

इनमें कंवर संधू को पार्टी सस्पेंड कर चुकी है। उम्मीद की जा रही थी कि संधू भी खैरा के साथ इस्तीफा देंगे, लेकिन उन्होंने नहीं दिया। वहीं, बाकी पांचों विधायक इस्तीफा देने को तैयार नहीं हैं। इसलिए फिलहाल खैरा गुट की रणनीति यह रहेगी कि वे खुलकर पार्टी बनाएंगे और पंजाब का दौरा कर संगठन मजबूत करेंगे। जबकि, 'आप' के बाकी छह विधायक अंदर खाते काम करेंगे। क्योंकि खुल कर खैरा के साथ आए तो उन पर एंटी डिफेक्शन लॉ के तहत कार्रवाई हो सकती है।
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सभी बागी विधायक गए तो जा सकता है एलओपी का पद

आम आदमी पार्टी को लगातार दूसरा झटका लगा है। एचएस फूलका के बाद अब सुखपाल खैरा ने भी पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। जिस कारण सदन में पार्टी के दो विधायक कम हो जाएंगे। फूलका पहले स्पीकर को मिल कर इस्तीफा दे चुके थे। हाल ही में उन्होंने पार्टी से भी इस्तीफा दिया था। अभी तक उनका इस्तीफा मंजूर नहीं हुआ है। खैरा के 'आप' छोड़ने के बाद अब उनकी सदस्यता भी जाना तय है।

हालांकि खैरा ने दो दिन पहले एलान किया था कि वह विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा नहीं देंगे। अगर पार्टी ने उनके खिलाफ कुछ किया तो वह दिल्ली में आंदोलन करेंगे। माना जा रहा है कि 'आप' कन्वीनर अरविंद केजरीवाल बिना कोई समय गंवाए विधानसभा स्पीकर को पत्र भेजेंगे। जिसमें लिखा होगा कि जिस पार्टी के टिकट पर खैरा चुनाव जीते थे, वह उसे छोड़ चुके हैं, इसलिए उनकी सदस्यता खत्म की जाए। उसके बाद फैसला लेने का अधिकार स्पीकर के पास है। हालांकि वह निजी तौर पर बुलाकर खैरा का पक्ष जरूर सुनेंगे।

स्पीकर कितने समय में उन्हें हटाने का फैसला करते हैं, यह उन पर निर्भर है। हरियाणा में कुलदीप विश्नोई के साथी विधायकों के कांग्रेस के साथ जाने के मामले में फैसला लटकता ही रहा और विधानसभा का कार्यकाल भी खत्म हो गया। लेकिन पंजाब में ऐसे आसार नहीं हैं, क्योंकि सरकार कांग्रेस की है, जो खुद ही खैरा से छुटकारा चाहती है। दो विधायकों के जाने के बाद सदन में 'आप' के 18 सदस्य बचे हैं। इस तरह सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर एलओपी पद बरकरार रहेगा। लेकिन अगर खैरा के साथ बागी छह विधायक भी पार्टी छोड़ते हैं तो यह कुर्सी अकाली दल के पास चली जाएगी।
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