सुखना वेटलैंड को ग्लोबल दर्जा, बनी रामसर साइट
चंडीगढ़ को मिला पहला अंतरराष्ट्रीय वेटलैंड स्थल, अब झील के आसपास के विकास पर रहेगी पैनी नजर
जलग्रहण क्षेत्र, जल प्रवाह और जैव विविधता बचाने के लिए बनेगी वैज्ञानिक प्रबंधन व्यवस्था भारत में रामसर साइटों की संख्या बढ़कर 103 हुईचंडीगढ़। सुखना झील की खूबसूरती अब अंतरराष्ट्रीय महत्व की प्राकृतिक धरोहर के रूप में भी पहचानी जाएगी। सुखना वेटलैंड को 15 अक्तूबर 2026 को आधिकारिक रूप से रामसर साइट घोषित कर दिया गया। इसके साथ चंडीगढ़ को पहला रामसर स्थल और भारत को 103वां रामसर स्थल मिला है। यह उपलब्धि वेटलैंड संरक्षण और जैव विविधता की सुरक्षा के लिहाज से अहम है। अब झील, उसके जलग्रहण क्षेत्र और आसपास के प्राकृतिक आवासों को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी और बढ़ गई है।
रामसर का दर्जा सुखना के पर्यावरणीय और सांस्कृतिक महत्व को अंतरराष्ट्रीय पहचान देता है। यह वेटलैंड सेंट्रल एशियन फ्लाईवे यानी मध्य एशियाई उड़ान मार्ग से गुजरने वाले हजारों प्रवासी पक्षियों के लिए भोजन, प्रजनन और सर्दियों में ठहरने का महत्वपूर्ण ठिकाना है। यहां खुला पानी, तटीय वनस्पतियां, झाड़ियां और जंगल जैसे विविध प्राकृतिक आवास मौजूद हैं। प्रमुख जीवों में संकटग्रस्त कॉमन पोचार्ड, पल्लास फिश ईगल और ब्लैक पॉन्ड टर्टल शामिल हैं।
अब किन बातों पर रहेगी नजर
रामसर दर्जे के बाद पानी की गुणवत्ता, प्राकृतिक जल प्रवाह, गाद की समस्या, पक्षियों के आवास और जैव विविधता की सुरक्षा पर विशेष ध्यान देना होगा। वेटलैंड और उसके निर्धारित प्रभाव क्षेत्र में लागू नियमों के अनुसार अतिक्रमण, ठोस कचरा डालने, बिना उपचार गंदा पानी छोड़ने, औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार और प्रतिबंधित निर्माण जैसी गतिविधियों पर नियंत्रण जरूरी होगा। जलग्रहण क्षेत्र के बेहतर प्रबंधन और पर्यावरण सुधार के लिए वैज्ञानिक योजना अहम रहेगी। अंतरराष्ट्रीय मान्यता से वैज्ञानिक सहयोग, तकनीकी सहायता, पर्यावरण शिक्षा और जिम्मेदार इको-टूरिज्म के अवसर भी बढ़ सकते हैं।
1988 से शुरू हुआ संरक्षण का सफर
सुखना वेटलैंड को 1988 में राष्ट्रीय वेटलैंड के रूप में पहचान मिली। इसके बाद जलग्रहण क्षेत्र, गाद की समस्या, जलधारण क्षमता और जैव विविधता के संरक्षण पर योजनाबद्ध काम हुआ। सितंबर 2025 में चंडीगढ़ वेटलैंड अथॉरिटी की बैठक में रामसर स्थल बनाने के प्रस्ताव और पांच वर्षीय प्रबंधन योजना को मंजूरी दी गई। फरवरी 2026 में केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद अंतरराष्ट्रीय मान्यता का रास्ता साफ हुआ। 15 अक्तूबर 2026 को वेटलैंड को रामसर सूची में शामिल कर लिया गया। इस प्रक्रिया में चंडीगढ़ प्रशासन, वन एवं वन्यजीव विभाग, विशेषज्ञों और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े लोगों की भूमिका रही।
रामसर साइट क्या है?
रामसर साइट अंतरराष्ट्रीय महत्व की ऐसी आर्द्रभूमि है, जिसे रामसर कन्वेंशन के तहत सूचीबद्ध किया जाता है। इस समझौते को 1971 में ईरान के रामसर शहर में अपनाया गया था। इसका उद्देश्य वेटलैंड का संरक्षण और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना उसका समझदारी से उपयोग सुनिश्चित करना है।
कोट
सुखना वेटलैंड का अंतरराष्ट्रीय सूची में शामिल होना पर्यावरण संरक्षण और प्रकृति के बेहतर प्रबंधन की ऐतिहासिक उपलब्धि है। यह चंडीगढ़ के लोगों, पर्यावरण प्रेमियों, विशेषज्ञों और वन एवं वन्यजीव विभाग के लगातार प्रयासों का परिणाम है। इससे वेटलैंड संरक्षण, जैव विविधता की सुरक्षा और पर्यावरण प्रबंधन में भारत की वैश्विक साख मजबूत होगी। -गुलाबचंद कटारिया, राज्यपाल पंजाब एवं प्रशासक चंडीगढ़
वेटलैंड संरक्षण के प्रति भारत की प्रतिबद्धता लगातार मजबूत हो रही है। चंडीगढ़ की सुखना झील और उत्तर प्रदेश की सौज झील का रामसर सूची में शामिल होना जैव विविधता और पर्यावरण सुरक्षा की दिशा में बड़ा मील का पत्थर है। -भूपेंद्र यादव, केंद्रीय पर्यावरण मंत्री