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HSGPC को मान्यता: सुखबीर बादल ने जताया एतराज, कहा- सुप्रीम कोर्ट का फैसला पंथ पर हमला

Tue, 20 Sep 2022 10:39 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मोहाली (पंजाब)

सार

सुखबीर बादल ने कहा कि अकाली दल 100 साल पुराने अधिनियम के साथ छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं करेगा। पार्टी ने आगे की कार्रवाई के लिए वरिष्ठ नेताओं की एक आपात बैठक बुलाई है, जिसमें कानूनी सहारा लिया जाएगा।
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सुखबीर सिंह बादल। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के अध्यक्ष सुखबीर बादल ने हरियाणा सिख गुरुद्वारा (प्रबंधन) अधिनियम 2014 की वैधता को मान्यता देने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पंथ पर हमला करार दिया। उन्होंने कहा है कि इससे दुनिया भर के सिख समुदाय में गहरी नाराजगी है। पार्टी मुख्यालय में बुलाई प्रेस वार्ता में मंगलवार को शिअद अध्यक्ष ने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि एसजीपीसी, जोकि अंतरराज्यीय निकाय है, को राज्य के एक कानून को मान्यता देकर विभाजित किया गया है, जबकि इस मुद्दे पर कानून बनाने की शक्ति केंद्र के पास सुरक्षित थी। 

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कांग्रेस पार्टी दशकों से अकाली दल और सिख संस्थानों को कमजोर करने की कोशिश करती रही और हरियाणा में गुरुद्वारों के प्रबंधन के लिए एक अलग निकाय का गठन संबंधी 2014 का अधिनियम इसी रणनीति का हिस्सा था। यह उतना ही निंदनीय है कि कैप्टन अमरिंदर सिंह की अगुवाई वाली पूर्व पंजाब सरकार ने इस मामले में शीर्ष अदालत में एसजीपीसी विरोधी रुख अपनाया था। उन्होंने कहा, ‘आखिरी कील भगवंत मान सरकार ने ठोकी, जिसके महाधिवक्ता ने मामले में एसजीपीसी के खिलाफ लिखित दलील दी थी।’

सुखबीर बादल ने कहा कि अकाली दल 100 साल पुराने अधिनियम के साथ छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं करेगा। पार्टी ने आगे की कार्रवाई के लिए वरिष्ठ नेताओं की एक आपात बैठक बुलाई है, जिसमें कानूनी सहारा लिया जाएगा। उन्होंने सभी पंथक संगठनों से सिख समुदाय को बांटने और अप्रत्यक्ष तौर पर शासन करने के सिख विरोधी ताकतों के मंसूबों के खिलाफ एकजुट होने की अपील की है। 
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सुखबीर ने कहा कि देश ने पहले देखा है कि कैसे निर्वाचित दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी को रातोंरात बदल दिया और इसे अपने हाथों में ले लिया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि कैसे पंजाब पहले से ही नदी का पानी छीन लिए जाने और अपनी राजधानी चंडीगढ़ के बिना ही रह जाने से पीड़ित है। अब हरियाणा के लिए अलग कमेटी के गठन की मान्यता देकर एसजीपीसी को छोटा कर दिया गया है।

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