सेक्टर नौ स्थित ग्रेवाल आई इंस्टीट्यूट (जीईआई) में सोमवार को मोतियाबिंद सर्जरी में रोबोलेजर तकनीक का लाइव डेमो दिया गया।
यह तकनीक ब्लेड-फ्री लेजर प्रक्रिया है। इस तकनीक से ऑप्रेशन के लिए आंख के लेंस कैप्सूल में इंस्ट्रूमेंट से कट लगाने की जरूरत नहीं रहती।
रोबलेजर से कोर्नियल कट बेहद सटीकता से लगाया जाता है। ग्रेवाल आई इंस्टीट्यूट में पिछले तीन दिन के भीतर इस तकनीक दस लोगों के सफल आपरेशन किए जा चुके हैं।
सर्जन लेजर के उपयोग से सटीक कैप्यूलोटॉमी (सर्कुलर ओपनिंग) भी तैयार कर सकता है जिसे पारंपरिक तौर पर किसी भी प्रकार से नहीं किया जा सकता था।
भारतीय मूल के अमेरिकी डाक्टर दिलराज ने रोबोलेजर प्रक्रिया के लिए अवार्ड प्राप्त ट्रेनिंग माड्यूल तैयार किया है।
उन्होंने बताया कि रोबोलेजर कैटारेक्ट के सटीक 3डी मैप्स तैयार कर लेता है, जिससे प्रत्येक आंख के लिए विशेष योजना बनाई जा सकती है।
रोबोलेजर, एक सटीक आकार, प्रकार और केन्द्रीय सर्कुलर ओपनिंग भी करता है जिससे मोतियाबिंद को हटाने की प्रक्रिया अन्य पारंपरिक प्रक्रियाओं के मुकाबले 10 गुणा अधिक सटीकता से होती है।
रोबोलेजर प्रक्रिया पूरी तरह से प्रत्येक आंख के लिए विशेष तौर पर तैयार की जाती है और 50 तरह के मापकों को नए सिरे से एडजस्ट किया जाता है और प्रत्येक मरीज के लिए विशेष तौर पर तैयार किया गया इलाज संपूर्ण सटीकता के साथ प्रदान किया जाता है।
ग्रेवाल आई इंस्टीट्यूट के सीईओ डा. एसपीएस ग्रेवाल ने बताया कि रोबोलेजर सर्जरी की मदद से मरीज मिनटों में घर जा सकता है। यह शनदार नजर प्रदान करती है और जटिलताओं को भी काफी कम करती है।