चुनौतियों से पार पाना हो तो कोई आईएएस साहिल से सीखे। भले ही कितनी मुश्किलें हो, लेकिन साहिल ने जो कर दिखाया, वह किसी चमत्कार से कम नहीं।
साल 2012 में जब एम्स में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे थे, तभी उनका एक्सीडेंट हो गया। हादसे में राइट हैंड क्षतिग्रस्त हो गया और कम करना बंद कर दिया। अगर कुछ लिखना हो तो अंगुलियां नहीं चलतीं थीं।
एक बार तो साहिल को लगा कि उसका डॉक्टर का प्रोफेशन खत्म हो जाएगा। मरीज कैसे विश्वास करेगा कि एक हाथ का डॉक्टर उनका इलाज कर पाएगा। इन्हीं पंक्तियों को साहिल ने हथियार बनाया और आईएएस की तैयारी में जुट गए।
सबसे पहले उन्होंने लेफ्ट हाथ से एबीसी लिखना शुरू किया। जमकर प्रैक्टिस की। दिन-रात एक कर दिया। कुछ दिन बाद लगा कि साहिल बचपन से ही लेफ्ट हैंड से लिखता आ रहा है।
बिना कोचिंग लिए पहले प्रयास में पाई सफलता
साहिल के पिता प्रेम चंद ने बताया कि उनके बेटे के सामने दूसरा कोई ऑप्शन नहीं था। उसने हार नहीं मानी और बिना कोचिंग लिए पहले ही प्रयास में आईएएस एग्जाम पास किया। साहिल ने सिविल सर्विसेज की परीक्षा में 447 वां रैंक हासिल किया है।
साहिल के पिता प्रेम चंद पंजाब में पीसीएस ऑफिसर हैं। वह पंजाब सरकार के लोकल गर्वनमेंट के स्पेशल सेक्रेटरी हैं। ‘अमर उजाला’ से बातचीत में उन्होंने बताया कि उनका बेटा शुरू से ही पढ़ने में होनहार था।
बारहवीं तक उसके 90 प्रतिशत तक अंक आए। 2008 में एम्स में मेडिकल की पढ़ाई के लिए सिलेक्शन हुआ। वे इस समय दिल्ली एम्स में ही हैं। साहिल के बड़े भाई अभय कुमार हॉलीवुड से जुड़े हैं।
साहिल ने सफलता के लिए ये समझौते किए
प्रेम चंद ने बताया कि आईएएस की तैयारी आसान नहीं होती। बच्चों को पढ़ाई के दौरान कई समझौते करने पड़ते हैं। साहिल किसी रिश्तेदार के घर नहीं गया। अगर कोई फंक्शन होता था तो वे बिना बच्चों के ही जाते। आवारा गर्दी छोड़नी पढ़ती है।
उन्होंने कभी अपने बच्चों पर आईएएस बनाने का दबाव नहीं डाला। प्रेमचंद ने बताया कि उनका बेटा उन्हें ही देखता और एक अच्छा ऑफिसर बनने की इच्छा रखता था।
प्रेम चंद इस समय मनीमाजरा के मॉडर्न कांप्लेक्स स्थित ड्यूप्लेक्य हाउस नंबर 6002 में रहते हैं। साहिल इस समय दिल्ली एम्स में ही है।