पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने राज्य सभा चुनाव में सुभाष चंद्रा की जीत को चुनौती देने वाली वरिष्ठ अधिवक्ता आर के आनंद की याचिका को खारिज कर दिया है। इसके लिए सुभाष चंद्रा द्वारा दाखिल अर्जी को आधार बनाया गया और अर्जी को मंजूरी मिलने के चलते ही याचिका खारिज हुई।
दरअसल अर्जी में चंद्रा ने कहा था कि चुनाव याचिका में आवश्यक तकनीकी नियम की पालना नहीं की गई और ऐसे में फार्मेट 25 ए के अधूरे होने के चलते इस याचिका को खारिज किया जाए। हाईकोर्ट ने इस कानूनी आधार पर चंद्रा की अर्जी मंजूर करते हुए उनके खिलाफ याचिका खारिज कर दी। याचिका के खारिज होने के साथ ही सुभाष चंद्रा के राज्यसभा सांसद पद पर लगा सवालिया निशान भी हट गया है।
सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता आरके आनंद ने याचिका दाखिल करते हुए सुभाष चंद्रा के निर्वाचन को चुनौती दी थी। याचिका में आनंद ने कहा था कि सुभाष चंद्र की जीत एक साजिश का नतीजा है। साजिश के चलते ही चुनाव प्रक्त्रिस्या के दौरान वह पेन बदल दिया गया था जिस पैन से वोटिंग की जानी थी। पैन बदले जाने के कारण वोट अमान्य हो गई। आनंद ने कहा कि यदि स्याही विवाद नहीं होता तो जो वोट रद्द हो गई थी वह उनके पक्ष में पढ़ती और विजय उनकी होती। वोट अमान्य होने के कारण ही सुभाष चंद्र को जीत मिल गई। याची ने कहा कि पेन ऐसे ही नहीं बदल गया बल्कि यह पूर्व नियोजित तरीके से बदला गया था।