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विकास बराला गिरफ्तार, जानिए क्या बच पाएगी सुभाष बराला की कुर्सी?

Thu, 10 Aug 2017 09:20 AM IST
प्रवीण पाण्डेय/अमर उजाला, चंडीगढ़
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प्रदेशाध्यक्ष के बेटे की करतूत से भाजपा असहज
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बेटे की करतूत के चलते अपनी राजनीतिक साख बचाने में जुटे हरियाणा भाजपा अध्यक्ष सुभाष बराला ने अपने बेटे को सरेंडर करवा दिया है, लेकिन बराला कुर्सी पर संकट अभी बरकरार है। चौतरफा दबाव, अपने राजनीतिक कैरियर की फिक्र के बीच आखिरकार काूनन के सामने नतमस्तक हुए बराला ने कलेजे पर पत्थर रख कर बेटे को पुलिस के सामने पेश करने का फैसला कर  ही लिया।
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पिछले चार दिनों से धर्मसंकट में फंसे बराला के सामने सिर्फ दो विकल्प थे। पहला अपनी और पार्टी की साख बचाना और दूसरा बेटे को कानून के सुपुर्द करना। परिवार और राजनीतिक दबाव के बीच बराला ने पहले विकल्प को चुना। इस पूरे घटनाक्रम में विपक्ष की मांग बराला का इस्तीफा है।

ऐसे में बेटे को कानून के सुपुर्द करने के बावजूद बराला की कुर्सी से खतरे के बादल पूरी तरह से छंटे नहीं है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह गुजरात राज्य सभा चुनाव से फुर्सत पा चुके हैं। बराला को अभयदान देना है या नहीं यह उनके फैसले पर निर्भर होगा।
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मुख्यमंत्री की चली तो बराला को मिलेगा अभयदान:

Haryana CM on Vikas Barala Case - फोटो : File Photo
बराला की कुर्सी जाएगी या फिर बचेगी यह सवाल राजनीतिक व प्रशासनिक गलियारों में अभी भी मंथन का विषय बना हुआ है। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी, राबर्ट वाड्रा, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के तीखे कमेंट आने के बाद भाजपा का थिंक टैंक डैमेज कंट्रोल में जुटा है, लेकिन हल निकलता दिखाई नहीं दे रहा।

चारों तरफ हो रही किरकिरी में हरियाणा के नेताओं ने यह सुझाव दिए हैं कि अगर बराला का इस्तीफा ले लिया जाता है तो भी विपक्षी दल इस मुद्दे को उनके खिलाफ  इस्तेमाल करेंगे और बराला पद पर बने रहेंगे, तब भी विपक्ष इस बात को मुद्दा बनाएगा। सूत्रों के मुताबिक गुजरात राज्य सभा चुनाव से फुर्सत पाने के बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने इस मामले में फीडबैक लिया है।

मुख्यमंत्री की चली तो बराला को मिलेगा अभयदान:
मुख्यमंत्री मनोहर लाल के समर्थन के चलते प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी पर काबिज हुए बराला के लिए मुख्यमंत्री के दिल में स्थान तो है, लेकिन मामला तूल पकड़ जाने केकारण केंद्र में बैठे लोग नफा नुकसान का आंकलन कर रहे हैं। राजनीतिक उठा पटक के बीच यदि बराला की कुर्सी बचती है तो बराला को नया राजनैतिक जीवन मिलेगा। अन्यथा हरियाणा भाजपा के ही कई नेता प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी के लिए लाइन लगाए हुए हैं।
 
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