बोर्ड परीक्षाओं को लेकर शुरुआत से ही तैयारी कर रहे थे। परीक्षा होनी चाहिए थी, क्योंकि इससे सभी विद्यार्थियों को एक निष्पक्ष मौका मिलता और हम अंकों को लेकर अधिक संतुष्ट होते।
-विशेष, जीएमएसएसएस-16
परिणाम के लिए सरकार अपनाए निष्पक्ष प्रणाली
इस बात से संतुष्ट है कि कोई एक निर्णय पर पहुंचे हैं, क्योंकि पिछले कुछ दिनों से तनाव के कारण पढ़ाई भी नहीं हो पा रही थी। सरकार निष्पक्ष प्रणाली से अंक दे, ताकि कॉलेजों में दाखिला लेने में समस्या न आए।
-हर्षिता, जीएमएसएसएस-35
विद्यार्थी और शिक्षक दोनों असमंजस में
इस फैसले से सभी असमंजस की स्थिति में हैं। विद्यार्थियों को किस आधार पर बारहवीं के अंक दिए जाएंगे, कॉलेज में किस आधार पर दाखिला मिलेगा, इन सब सवालों के जवाब नहीं मिल पाए हैं।
-एचएस मामिक, अध्यक्ष, इंडिपेंडेंट स्कूल एसोसिएशन
वर्तमान हालात के हिसाब से सरकार का फैसला सही है। इस समय संक्रमण का भय अभिभावकों में ज्यादा है लेकिन सभी बच्चों का प्राथमिक आधार पर टीकाकरण करवाकर परीक्षाएं आयोजित करवाई जा सकती थीं।
- कौशल, अभिभावक
सरकार का फैसला ठीक
परीक्षा नहीं होना भविष्य के लिए चिंताजनक है लेकिन वर्तमान हालातों को देखते हुए बच्चों का स्वास्थ्य अधिक जरूरी है। अभिभावक के तौर पर इस समय बढ़ते कोरोना संक्रमण को देखते हुए यह फैसला ठीक लग रहा है, क्योंकि स्वास्थ्य सर्वोपरि है।
-विनोद इंदौरा, अभिभावक
फैसला निराश करने वाला
बारहवीं बोर्ड कक्षा के भविष्य को देखते हुए परीक्षा रद्द करना सही नहीं है। हर बार परीक्षा रद्द करने से शैक्षणिक गुणवत्ता प्रभावित करेगी। वहीं दूसरी ओर जिन विद्यार्थियों ने पूरे साल कड़ी मेहनत की है, उनके लिए यह निराश करने वाला फैसला है।
-नितिन गोयल, अध्यक्ष, अभिभाववक संघ