पंजाब यूनिवर्सिटी के छात्रों ने अब अगली मांग पीयू प्रशासन के समक्ष रख दी है। यह मांग गरीब विद्यार्थियों के हित में है। जो अगले शैक्षिक सत्र में एडमिशन लेने का सपना देख रहे हैं, लेकिन उनके पास जमा करने को फीस नहीं है। लॉकडाउन के कारण गरीब परिवारों के पास पैसे नहीं हैं, क्योंकि उनके परिवार के मुखियाओं को कोई काम नहीं मिला और न लॉकडाउन में कर सके।
इन परिवारों के विद्यार्थियों की एक सेमेस्टर की फीस मांफ करने की मांग उठी है। पीयू इन विद्यार्थियों को कितनी राहत देगा या नहीं यह तो बाद की बात है, लेकिन एनएसयूआई ने इन छात्रों के हित में पहल कर दी है। उन्होंने चांसलर से लेकर पीयू वीसी तक मेल किए हैं और तर्क भी दिए हैं। तर्कों पर गौर किया गया तो इन छात्रों को पीयू बड़ी राहत दे सकता है।
1. लॉकडाउन खुलने के बाद पीयू में दो सप्ताह कक्षाएं लगेंगी
छात्र संगठनों ने इससे पूर्व एक बीड़ा उठाया था कि ऑनलाइन पढ़ाई का लाभ सभी विद्यार्थियों को नहीं मिल रहा है और कोर्स भी पूरा नहीं होगा। साथ ही पीयू प्रशासन 15 दिन में एग्जाम भी खत्म कर देगा। पीयू के इस निर्णय से सभी को नुकसान होगा। छात्र परेशानी से गुजर रहे थे। चारों ओर से पीयू प्रशासन पर दबाव पड़ा और आखिरकार पीयू ने निर्णय लिया कि लॉकडाउन खुलने के बाद दो सप्ताह तक कक्षाएं लगाई जाएंगी। साथ ही एग्जाम भी 15 दिन में खत्म नहीं किए जाएंगे। यहां विद्यार्थियों को बड़ा लाभ मिला है।
2. हॉस्टलों की फीस बढ़ाने का मुद्दा विचाराधीन
दूसरा मुद्दा हॉस्टलों की फीस का एक्सटेंड करवाने का था जो पीयू प्रशासन के पास विचाराधीन है। विद्यार्थियों का कहना है कि 22 मार्च से तीन मई तक लॉक डाउन हो गया। इस बीच वह हॉस्टलों में रहे नहीं। चालू सत्र में विद्यार्थियों की पढ़ाई होगी और फिर एग्जाम होंगे तो उन्हें जून-जुलाई तक रहना पड़ सकता है। ऐसे में जनवरी में ली गई फीस को एक्सटेंड किया जाए। इस पर निर्णय होना बाकी है।
3. अब गरीब विद्यार्थियों के हित में उठाया मुद्दा
अब तीसरा मुद्दा गरीब विद्यार्थियों के हित में उठाया गया है। एनएसयूआई के अध्यक्ष निखिल नरमेटा ने चांसलर, वीसी व उच्च शिक्षा अधिकारियों को मेल से पत्र भेजा है। कहा है कि नए सेशन में एडमिशन लेने वाले विद्यार्थियों के पास फीस जमा करने को नहीं होगी। तमाम विद्यार्थियों ने उन्हें फोन करके बताया है। उनका सपना पढ़ने का है लेकिन फीस बाधा बनेगी। ऐसे में एक सेमेस्टर की फीस पीयू प्रशासन को माफ करनी चाहिए। या फिर चालू सत्र में जो फीस ली गई है उसको अगले शैक्षिक सत्र के पहले सेमेस्टर में जोड़े। क्योंकि इस सत्र में विद्यार्थियों को पढ़ाई का लाभ लॉकडाउन के कारण नहीं मिल पाया है।