22 साल बाद हरियाणा में शुरू हुए छात्रसंघ चुनाव पुलिस के कड़े पहरे में संपन्न हुए। इस छात्रसंघ चुनाव से जहां हरियाणा की राजनीति में नई पौध की नींव रख दी है, वहीं आने वाले समय में विभिन्न सियासी दलों को हरियाणा से कई नए युवा नेता भी मिलेंगे। उधर, हरियाणा सरकार भी चुनाव के संपन्न होने से गदगद है। साथ ही सरकार खुद को छात्रसंघ चुनाव की पहली परीक्षा में सफल मान रही है।
सरकार ने ये भी दावा किया है कि इस बार अप्रत्यक्ष चुनाव करवाए गए हैं, क्योंकि समय कम था। लेकिन अगली बार से कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में छात्रसंघ चुनाव प्रत्यक्ष रूप से करवाए जाएंगें। उधर, देरशाम तक 11 राज्य विश्वविद्यालयों तथा 224 महाविद्यालयों के चुनाव परिणाम घोषित किए गए। हरियाणा के शिक्षा मंत्री राम बिलास शर्मा ने छात्रसंघ के चुनाव में विजेता विद्यार्थियों को बधाई दी।
उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि इस चुनाव में जीते हुए विद्यार्थी पढ़ाई का माहौल और अधिक सुधारने व विद्यार्थी हित के मामले सरकार के संज्ञान में लाकर उनको सहीं ढ़ंग से अमलीजामा पहनाने में मदद करेंगे। उन्होंने बताया कि प्रदेश में 22 साल तक छात्रसंघ के चुनाव नहीं करवाए गए। इस दौरान कई राजनीतिक दलों की सरकारें सत्ता में आई परंतु किसी ने भी इस ओर कदम नहीं उठाया।
वर्तमान सरकार ने अपने घोषणा पत्र में किए वादे के अनुसार आज प्रदेश में शांतिपूर्वक छात्रसंघ के चुनाव संपन्न करवा दिए हैं, जिसके लिए विश्वविद्यालयों के कुलपतियों व महाविद्यालयों प्राचार्यों एवं विद्यार्थी, अध्यापकगण व विभागीय अधिकारी भी बधाई के पात्र हैं। शर्मा ने बताया कि देरशाम 5 बजे तक छात्र संघ के चुनाव के मिले परिणामों के अनुसार प्रदेश के 11 राज्य विश्वविद्यालयों में 1108 कक्षा प्रतिनिधियों (सीआर) के लिए चुनाव सम्पन्न हुए जिनमें 517 निर्विरोध 254 चुनाव प्रक्रिया द्वारा तथा 296 कक्षा टॉपर चुने गए।
इन्होंने विश्वविद्यालय की छात्र कार्यकारिणी परिषद के गठन के लिए अपने मताधिकार का प्रयोग करते हुए प्रधान, उपप्रधान, सचिव व उपसचिव तथा पांच कार्यकारिणी परिषद के सदस्यों का चुनाव किया। इसके अलावा, उन सभी महाविद्यालय जो कि वर्ष 2016-2017 में या इससे पूर्व में स्थापित किए जा चुके हैं , में छात्रसंघ चुनाव करवाए गए।
कुल 288 कालेजों में से बुधवार शाम तक मिले परिणामों के अनुसार 224 महाविद्यालयों में 4011 कक्षा प्रतिनिधियों के लिए चुनाव सम्पन्न हुए जिनमें 1862 निर्विरोध, 966 चुनाव प्रक्रिया द्वारा तथा 1183 कक्षा टॉपर चुने गए। इन्होंने भी अपने-अपने महाविद्यालयों की छात्र कार्यकारिणी परिषद के गठन के लिए अपने मताधिकार का प्रयोग करते हुए प्रधान, उपप्रधान, सचिव व उप-सचिव तथा पांच कार्यकारिणी परिषद के सदस्यों का चुनाव किया।