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ढलान पर पैर फिसलने से सुखना चो में डूबकर छात्र की मौत

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मनीमाजरा। किशनगढ़ के नजदीक शनिवार दोपहर सुखना चो में डूबकर एक छात्र की मौत हो गई। अपने मामा के दो बेटों के साथ वह सुखना चो के पास खेल रहा था। ढलान पर पैर फिसलने से वह सीधा पानी में जा गिरा। करीब एक घंटे बाद जाल डालकर उसे निकाला गया, लेकिन तब तक वह दम तोड़ चुका था।
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पुलिस के मुताबिक, शनिवार दोपहर 12.45 बजे सूरजपुर निवासी सुमित (13) अपने ममेरे भाइयों मोहित (13) और सोहित (9) के साथ खेल रहा था। इसी बीच सुमित लाइटर उठाने के लिए दौड़ा तो ढलान पर पैर फिसलने से गहरे पानी में जा गिरा। मोहित और सोहित ने यह देख शोर मचाया तो आसपास के लोग पहुंच गए। पुलिस को सूचना दी गई। आईटीपार्क थाने की पुलिस ने सुमित को ढूंढना शुरू किया। कांस्टेबल रामबीर सिंह ने पानी में कूदकर सुमित को खोजा लेकिन वह नहीं मिला। इस दौरान रामबीर चोटिल हो गए। फायर विभाग के कर्मचारी व गोताखोरों के अलावा किशनगढ़ निवासी एक व्यक्ति भी पानी में सुमित को तलाशने कूदे लेकिन तब तक वह काफी नीचे जा चुका था। बाद में फायर विभाग ने जाल डालकर बच्चे को ढूंढ निकाला। इस दौरान करीब एक घंटा गुजर गया। सुमित को तुरंत जीएमएसएच-16 ले जाया गया, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया।
सुमित सातवीं कक्षा में पढ़ता था। उसके ममेरे भाइयों ने बताया कि उन्हें रास्ते में एक लाइटर पड़ा मिला था, जो सुखना चो के किनारे खेलते समय ढलान पर गिर गया। इसे उठाने के दौरान ही सुमित का पैर फिसल गया और वह पानी में चला गया।
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पिता भी रहते हैं बीमार
कुछ दिन पहले इंदिरा कॉलोनी में अपने मामा के घर आए सुमित की सोमवार को परीक्षा थी। उसे रविवार को अपने मामा संजीव और चंचल के यहां से सूरजपुर जाना था। सुमित के पिता अजय बीमार रहते हैं। सुमित अपने माता-पिता का दूसरा बेटा था। उसका एक बड़ा भाई नवीन है। सुमित की मौत के बाद मां आशा का रो-रोकर बुरा हाल है। दूसरी ओर, आईटी पार्क थाना पुलिस के मुताबिक, बच्चे के सुखना चो में गिरने की सूचना के तुरंत बाद टीम मौके पर पहुंच गई थी और एक घंटे तक उसे तलाशा गया। रविवार को पोस्टमार्टम करवाकर शव परिजनों को सौंप दिया जाएगा।
फायर विभाग ने की मशक्कत, लोगों में रोष
फायर विभाग के कर्मचारियों ने बच्चे को बचाने के लिए काफी मशक्कत की, खुद फायरमैन पानी के अंदर कूद गए। विभाग के गोताखोर भी काफी देर तक बच्चे को ढूंढते रहे। उधर, घटनास्थल पर मौजूद किशनगढ़ निवासियों में रोष है कि फायर कर्मचारियों के पास ऐसा कोई उपकरण नहीं था, जो ऐसी घटना में काम आ सके। उनका कहना है कि सुखना चो की गहराई काफी ज्यादा थी, गोताखोर इतनी गहराई में पहुंच नहीं पा रहे थे, अगर उपकरण होते तो शायद सुमित जिंदा होता।
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