किसानों ने धान की कटाई के साथ खेतों में पराली जलाने का सिलसिला शुरू कर दिया है। पराली को आग लगाने में सूबे के 12 जिले सबसे आगे चल रहे हैं। पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी के पंजाब रिमोट सेंसिंग सेंटर की तरफ से 27 सितंबर को सेटेलाइट से ली गई इमेज से खुलासा हुआ है कि अभी तक प्रदेश में 459 जगहों पर किसानों ने पराली को आग लगाई है।
धान की फसल की कटाई के साथ बचे अवशेष (पराली) को लंबे समय से किसान जलाते आ रहे हैं। बीते कुछ साल से पराली को आग लगाने से रोकने के लिए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल सहित अदालतों ने भी सख्ती दिखाई है। पराली जलाने के सिलसिले को रोकने के लिए पंजाब सरकार हर साल आदेश जारी करती है।
किसान सरकारी आदेशों की परवाह किए बिना धड़ल्ले से पराली को जलाते हैं। इस साल भी धान की कटाई का सीजन शुरू हो चुका है, इस समय खेत पकाली से भरे पड़े हैं। इस पराली को खत्म करने के लिए किसानों ने आग लगाने का काम शुरू कर दिया है।
इन जिलों में जलाई जा रही है पराली
पंजाब रिमोट सेंसिंग सेंटर के अनिल सूद बताते है कि उनके विभाग ने 21 सितंबर से सेटेलाइट से जांच करनी शुरू दी है। 27 सितंबर की शाम तक पंजाब में 459 जगह पर पराली को आग लगाई गई है, जोकि बीते साल से मुकाबले दोगुना है। साल 2018 में 27 सितंबर तक सिर्फ 15 मामले सामने आए थे, जबकि साल 2019 में बढ़कर आंकड़ा 202 तक पहुंच गया था।
इस साल अभी तक 459 मामले पकड़ में आ चुके है। इसमें सबसे ज्यादा अमृतसर में 318, तरनतारन में 82, पटियाला में 16, गुरदासपुर में 14, लुधियाना में 10, कपूरथला में 6, एसएएस नगर में 4, संगरूर में 3, जालंधर में 3 जगह पराली जलाई जा चुकी है। इसके अलावा एसबीएस नगर, फरीदकोट और बरनाला में एक-एक जगह पर पराली को आग के हवाले किया जा चुका है।
अभी धान की कटाई का काम चल रहा है, हो सकता है किसी जगह पराली को जलाया गया हो। विभाग की टीमें बनाकर जांच की जा रही है। अगर किसी किसान ने खेत में पराली जलाई तो उसके खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।
- नरिंदर सिंह, मुख्य कृषि अधिकारी, लुधियाना