हरियाणा में 25 सिंतबर से 14 अक्तूबर तक 1386 से अधिक जगहों पर पराली जलाई जा चुकी है। इसके लिए सरकार ने किसानों के चालान करने भी शुरू कर दिए हैं। किसानों की इस हरकत पर सैटेलाइट से नजर भी रखी जा रही है। सरकार को यही चिंता सता रही है कि पराली जलाने का यह सिलसिला यदि दिवाली तक यूं ही चलता रहा तो प्रदेश की आबोहवा पर बहुत बुरा असर पड़ेगा।
प्रदेश के आठ जिलों की हवा हुई खराब
पराली जलाने का असर है कि पंजाब के आठ जिलों की हवा की गुणवत्ता खराब हो गई है। लुधियाना का वायु गुणवत्ता सूचकांक ऑरेंज जोन में पहुंच गया है। बाकी सात जिले एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) के अनुसार येलो जोन में हैं। पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार राज्य में अभी धान की फसल पूरी तरह से नहीं कटी है। आने वाले दिनों में हालात और भी खराब होने की आशंका है। पंजाब के लिए पराली हमेशा ही परेशानी का सबब रही है। इस साल भी सरकार के दावों के विपरीत पराली जलाने से पंजाब की आबोहवा खराब होने लगी है।
पंजाब के आठ जिलों का एक्यूआई स्तर
- क्रम शहर एक्यूआई
- 1. लुधियाना 218
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- 2. पटियाला 165
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- 3. बठिंडा 157
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- 4. मंडी गोविंदगढ़ 153
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- 5. जालंधर 152
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- 6. खन्ना 152
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- 7. अमृतसर 145
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- 8. रोपड़ 82
पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड लगातार बढ़ते वायु प्रदूषण पर अंकुश लगाने के लिए प्रयासरत है। जिन जिलों में एक्यूआई का स्तर बढ़ा है, वह जिले कृषि प्रधान हैं। धान कटाई का समय है, ऐसे में प्रदूषण का स्तर बढ़ना लाजिमी है। करुणेश गर्ग, मेंबर सेक्रेट्री, पीपीसीबी।