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हरियाणा में 464 गांव ऐसे जहां सबसे ज्यादा जलती है पराली, जिलों में कैथल सबसे आगे

Fri, 01 Nov 2019 02:30 AM IST
ajay kumar मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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हरियाणा में 465 गांव ऐसे हैं, जहां सबसे ज्यादा पराली जलाने के मामले सामने आते हैं। इन गांवों में हर साल किसान धान की फसल लेने के बाद अपने खेतों में ही आग लगाकर पराली नष्ट कर देते हैं, इससे न केवल मिट्टी के पोषक तत्वों को नुकसान पहुंचता है, बल्कि आबोहवा पर भी इसका बुरा असर पड़ता है। हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने जिलावार इन गांवों की फेहरिस्त तैयार की है और संबंधित जिलों के डीसी को निर्देश दिए हैं कि वे इन गांवों पर खास नजर रखवाएं।

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हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड व कृषि विभाग भी इन गांवों में किसानों को जागरूक करने और उन्हें पराली प्रबंधन के गुर सिखाने में जुटा हुआ है। इतना ही नहीं जो किसान चेतावनी के बावजूद अपनी पराली खेतों में ही जलाकर नष्ट कर रहे हैं, उनके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज करवाई जा रही है। 

इस सीजन में भी अभी तक करीब 250 एफआईआर प्रदेश के विभिन्न इलाकों में इसी बाबत दर्ज करवाई जा चुकी है। हालांकि धान कटाई के बाद प्रदेश में पराली जलाने का काम शुरू हो चुका है, यह हालात नवंबर आखिर तक बने रहेंगे। फिलहाल पिछले साल की तुलना में इस साल अभी तक पराली जलाने के केस कम है, लेकिन इसके बावजूद प्रदेश के विभिन्न इलाकों में आबोहवा बिगड़ रही है।

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इन गांवों में 5453 जगह जलाई पराली

बोर्ड की ओर से सर्वाधिक पराली जलाने वाले चिह्नित किए 464 गांवों में पिछली साल 5453 जगह किसानों द्वारा पराली जलाई गई। जबकि पूरे प्रदेश में पराली जलाने के इससे भी अधिक थे। इन गांवों में अंबाला के 30 गांव शामिल हैं, जहां 143 जगह खेतों में पराली जलाई गई। 

इसी तरह भिवानी के 10 गांवों में 23 जगह, फतेहाबाद के 30 गांवों में 1210 जगह, हिसार के 30 गांवों में 189 जगह, झज्जर के 17 गांवों में 31 जगह, जींद के 30 गांवों में 667 जगह, कैथल के 30 गांवों में 666 जगह, करनाल के 30 गांवों में 509 जगह, कुरुक्षेत्र के 30 गांवों में 333 जगह, पलवल के 30 गांवों में 204 जगह, पंचकूला के 12 गांवों में 16 जगह, पानीपत के 25 गांवों में 38 जगह, रोहतक के 24 गांवों में 56 जगह, सिरसा के 30 गांवों में 1121 जगह, सोनीपत के 30 गांवों में 45 जगह, यमुनानगर के 30 गांवों में 96 जगह, चरखीदादरी, फरीदाबाद, महेंद्रगढ़, नूहं व गुरुग्राम के दस गांव में 10 जगह पराली खेतों में ही जलाई गई।
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अभी तक 3978 जगह खेतों में जल चुकी पराली

धान कटाई के बाद पराली जलाने की शुरूआत हो चुकी है। 2018 से 2019  की तुलना करें, तो अभी तक पराली जलाने के मामले गत वर्ष की तुलना में कम है। 29 अक्टूबर 2018 तक हरियाणा में 4310 केस पराली जलाने के सामने आ चुके हैं। जबकि इस साल 29 अक्टूबर 2019 पराली जलाने के 3978 केस ही अभी तक रिकार्ड किए गए हैं। यानी अभी तक 332 केस कम है। 

अभी तक सामने आए केसों में सबसे ज्यादा कैथल में 864 जगह पराली किसानों ने खेतों में ही जलाई है। जबकि अंबाला में 208 जगह, फतेहाबाद में 490 जगह, करनाल में 843 जगह, कुरुक्षेत्र में 657 जगह, जींद में 199 जगह, पलवल में 185 जगह, सिरसा में 166 जगह और यमुनानगर में 175 पराली जलाने की घटनाएं सामने आ चुकी है।

किसानों को खेतों में पराली न जलाने के लिए जागरूक किया जा रहा है। जबकि कृषि विभाग पराली प्रबंधन के गुर भी सिखा रहा है। खासकर फतेहाबाद और सिरसा में किसान सबसे ज्यादा पराली जलाते हैं। जिलावार ऐसे गांव भी चिह्नित किए हैं, जहां सबसे ज्यादा पराली खेतों में ही जलाई जा रही है। जिला उपायुक्तों पर इन गांवों पर भी फोकस रखने को कहा गया है। दूसरा, दिवाली की वजह से भी प्रदूषण का गुब्बार फिजां में बना हुआ था, जोकि अब कम हो रहा है। - एस. नारायणन, सदस्य सचिव, हरियाणा पोल्यूशन कंट्रोल बोर्ड
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