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साड्डा वसदा रहे पंजाब: पहले मुगल फिर अंग्रेज और आतंकवाद से लड़ा पंजाब... अब पाकिस्तान के सामने सीना ताने खड़ा

Sun, 13 Feb 2022 02:04 PM IST
निवेदिता वर्मा संजय पाण्डेय, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

पंजाब की राजनीति इस बात की गवाह रही है कि यहां पंथक, हिंदुओं, दलितों ने मिलकर सरकार का गठन किया है। इसमें डेरों की भूमिका भी काफी अहम रही है। अकाली दल ने अगर पंजाब में 25 साल सत्ता संभाली है तो वह पंथक व हिंदुओं और दलितों के वोट के बल पर।
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पंजाब - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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प्राचीन समय से अब तक पंजाब की गाथा संघर्ष भरी रही है। मुगल हों या अंग्रेज या फिर आज का पाकिस्तान, सबकी नजर पंजाब पर ही रही है। प्राचीन समय में पंजाब को सप्त सिन्धु के नाम से पुकारा जाता था और सिकंदर ने सबसे पहले पंजाब को अपना बनाने के लिए आक्रमण किया था। बाद में इस पर मुगलों की नजर पड़ी तो अनेक हमले झेले।

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पंजाब पवित्र गुरुओं की धरती भी है। यहां सिख गुरुओं ने जन्म लिया था। गुरुओं ने धार्मिक उपदेश दिए साथ ही अनेक वीरों ने बलिदान दिए। इस कारण यह स्थान पवित्र स्थानों की गिनती में शुमार है। पंजाब की मिट्टी में कुछ तो खास है, इसलिए तो कई महान देशभक्तों ने यहां जन्म लिया जैसे लाला लाजपत राय, शहीद भगत सिंह, शहीद उधम सिंह, करतार सिंह सराभा आदि। आज भी उनकी गाथाएं युवाओं में जोश व देशभक्ति का जज्बा पैदा करती हैं। शायद यही वजह है कि आज भी पाकिस्तान से सटी 553 किलोमीटर सीमा पर पंजाब सीना ताने खड़ा है।

आजादी से लेकर अब तक झेला सबसे ज्यादा संताप

1947 के बंटवारे के दौरान पंजाब ने हैवानियत का एक विराट संताप झेला। पंजाबियत इससे पहले कभी इतने बड़े पैमाने पर बर्बाद और शर्मसार नहीं हुई थी। लाखों मजलूमों के कत्ल, दुष्कर्म, अपहरण, लूटपाट, विश्वासघात, जबरी धर्मांतरण। 5 से 7 लाख लोग पंजाब के दोनों तरफ मारे गए। 80 लाख लोगों को 90 दिन के अंदर अपने घर-बार छोड़कर भागना पड़ा। पंजाब टूट गया, आधा पाक में तो आधा भारत में आ गया। 20 लाख बीघा खेतीबाड़ी की जमीन पाकिस्तान की तरफ चली गई। कत्लेआम से पंजाब शून्य पर आ गया। पंजाब की 553 किलोमीटर की सीमा पाक से सट गई। भारत पाकिस्तान से अलग तो हो गया लेकिन पंजाब में आग सुलगती रही।

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1950 के दशक में अकाली दल ने मास्टर तारा सिंह के नेतृत्व में पंजाबी सूबा आंदोलन चलाया। उन्होंने भाषा के आधार पर राज्य के विभाजन की मांग रखी। क्योंकि उस समय सिखों के साथ-साथ बहुत से हिन्दू भी इसी एक राज्य में रहते थे। उस समय सभी हिन्दुओं ने ‘हिंदी’ को राष्ट्र भाषा बनाने का समर्थन किया, जो कि पंजाबी बोलने वाले सिखों को नामंजूर था। इस मामले को राज्य पुनर्गठन आयोग के समक्ष प्रस्तुत किया गया। राज्य पुनर्गठन आयोग ने पंजाबी को हिंदी से अलग (व्याकरण की दृष्टि से) न मानते हुए इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया। लेकिन उन्होंने अपनी मांगों को जारी रखा और वे प्रदर्शन करते रहे।

16 साल के लंबे संघर्ष के बाद आखिरकार, सितंबर 1966 में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इनकी मांगों को स्वीकार किया और पंजाब पुनर्गठन अधिनियम के अनुसार पंजाब को तीन भागों में बांट दिया गया। शाह कमीशन के सुझाव पर पंजाब का दक्षिण भाग (जहां हरियाणवी बोली जाती थी) बन गया हरियाणा और जहां पहाड़ी बोली जाती थी, उस भाग को हिमाचल प्रदेश में मिला दिया गया।

शेष क्षेत्रों को मिलाकर (चंडीगढ़ को छोड़कर) एक नए पंजाबी बहुल राज्य का गठन किया गया। हरियाणा और पंजाब, दोनों ने ही चंडीगढ़ पर अपना अधिकार जताया। इसलिए, चंडीगढ़ को केंद्र शासित प्रदेश घोषित कर दिया गया, जो कि दोनों राज्यों की राजधानी के रूप में जाना जाता है।

किसानों की बदहाली

पंजाब में पिछले करीब पांच दशक से आर्थिक विकास की आंधी चली है। पंजाब ने पांच दशकों में कीटनाशकों का इतना अधिक इस्तेमाल किया कि पूरी धरती को ही जहरीली बना डाला। पंजाब के 40 फीसदी छोटे किसान या तो समाप्त हो चुके हैं या अपने ही बिक चुके खेतों में मजदूरी करने को मजबूर हैं। पैसे के लालच और दूसरे राज्यों के लिए अधिक से अधिक चावल बेचने के मोह ने फसल चक्र को उल्टा चला दिया। धान का उत्पादन इतना बढ़ा कि सड़ने लगा।

अधिक उत्पादन के कारण चोरी के नए-नए तरीके ईजाद हुए। सरकारी गोदामों में धान की बोरियां सड़ाने के लिए विशेष तौर पर सबमर्सिबल पंप लगाए गए। इससे शैलर मालिक और अधिकारियों की तिजोरियां भरती गईं। देखते ही देखते 12,644 गांवों में 15.5 लाख सबमर्सिबल धंसा दिए गए। कुछ ही साल में भूजल 20 से 250 फुट नीचे चला गया और आज कई स्थानों पर 400 फीट तक जा चुका है। कीटनाशक से पंजाब का पानी जहरीला हो चुका है। पंजाब दुनिया का पहला राज्य होगा, जहां से ‘कैंसर एक्सप्रेस’ चलती है। 

पंथक..दलित व डेरावाद पंजाब की राजनीति का बड़ा केंद्र

पंजाब की राजनीति इस बात की गवाह रही है कि यहां पंथक, हिंदुओं, दलितों ने मिलकर सरकार का गठन किया है। इसमें डेरों की भूमिका भी काफी अहम रही है। अकाली दल ने अगर पंजाब में 25 साल सत्ता संभाली है तो वह पंथक व हिंदुओं और दलितों के वोट के बल पर। पंजाब की राजनीति में धार्मिक डेरों का अच्छा खासा प्रभाव है। पंजाब में करीब 300 डेरे हैं लेकिन इनमें से 12 डेरों के समर्थकों की संख्या लाखों में है। राधास्वामी ब्यास, सच्चा सौदा, निरंकारी, नामधारी, दिव्य ज्योति जागृति संस्थान, डेरा संत भनियारावाला, डेरा सचखंड बल्लां, डेरा बेगोवाल, बाबा कश्मीरा सिंह का डेरा आदि शामिल हैं।

डेरा सचखंड रविदास बिरदारी का सबसे महत्वपूर्ण स्थान है। बिरादरी के सभी फैसले यहीं से होते हैं। डेरे ने वाराणसी में गुरु रविदास जी के जन्मस्थान पर धार्मिक स्थल का निर्माण कराया है। पंजाब में दलितों की आबादी 32 फीसदी है जबकि दोआबा में 42 फीसदी। एसजीपीसी बेशक धार्मिक संस्था व सिखों की मिनी पार्लियामेंट है लेकिन इसका कंट्रोल अकाली दल बादल के प्रधान के पास ही रहता आया है। उनकी मर्जी से ही एसीजीपीसी के प्रधान की नियुक्ति होती है। अकाली दल चुनावों में इसका सीधे रूप से फायदा भी लेता आया है और इसी के सहारे पंथक वोट बैंक को अपनी झोली में डालता आया है।  

नई राजनीति का उदय

पंजाब की सियासत में 2017 में आम आदमी पार्टी की एंट्री के बाद मुकाबला त्रिकोणीय हो गया था। इस बार किसान यूनियन के नेता भी हीरो बनकर उभरे हैं। भाजपा ने भी अकाली दल का साथ छोड़कर कैप्टन की पार्टी पंजाब लोक कांग्रेस से हाथ मिला लिया है। इस बार मुकाबला त्रिकोणीय के स्थान पर पांच कोणीय होने की संभावना बन गई है।

आंतकवाद का दौर... 14 साल ठहर सा गया था पंजाब 

खालिस्तान के रूप में एक अलग देश की मांग 1980 के दशक में और भी जोर पकड़ने लगी। मांग तेज होने के साथ इसका नाम ‘खालिस्तान आंदोलन’ पड़ा। पंजाब के विरुद्ध भारत सरकार के पक्षपात और रावी तथा ब्यास नदी के पानी के विभाजन को लेकर हुए विवाद को भी इस आंदोलन का एक कारण माना जाता है। इसी बीच एक चरमपंथी सिख नेता के रूप में 'दमदमी टकसाल' के जरनैल सिंह भिंडरावाला की लोकप्रियता भी बढ़ने लगी। 

ऑपरेशन ब्लूस्टार 

‘खालिस्तान’ आंदोलन के एक हिंसक रूप धारण करने के बाद पंजाब में आतंकी घटनाओं में काफी तेजी आने लगी। भिंडरावाले की लोकप्रियता तत्कालीन सरकार के लिए चुनौती बन गई। 1980 के बाद पंजाब ठहर सा गया। निवेश तो दूर की बात, पंजाब से उद्योग व कारोबारी पलायन करने लगे। 6 जून, 1984 को स्वर्ण मंदिर के भीतर भारतीय सेना ने एक व्यापक अभियान चलाया और जरनैल सिंह भिंडरावाला तथा उसके समर्थकों की मृत्यु हो गई। पंजाब में आतंकवाद का दौर फिर भी जारी रहा। 1992 में बेअंत सिंह की सरकार बनी और डीजीपी केपीएस गिल को लगाया गया, जिसके बाद आतंकवाद का सफाया हो गया। पंजाब की अमन शांति को भंग करने के लिए पाकिस्तान से आज भी हथियार, गोला बारूद भेजा जा रहा है।  

खेतों से फूटा किसान आंदोलन

तीन कृषि कानूनों के खिलाफ पंजाब के खेतों से निकला आंदोलन मिसाल बन गया। केंद्र सरकार को एक साल बाद झुकना पड़ा। आंदोलन ने पंजाब की सियासत में भारी बदलाव किया है। दिल्ली की सीमाओं पर एक साल तक बरसात, आंधी, सर्दी, गर्मी झेलकर भी शांतिपूर्ण आंदोलन से नई इबारत लिख डाली। अन्नदाताओं का यह इंकलाब आजादी के बाद सबसे लंबे आंदोलन का खिताब भी पा गया। किसानों की 32 जत्थेबंदियों की कामयाबी के गीत आज गांव गांव और शहर शहर में गाए जा रहे हैं। जिस किसानी को हेय दृष्टि से देखा जाता था, वह इस आंदोलन में एक बड़ा ब्रांड बनकर उभरी।  

 

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हौसले के साथ पंजाब की बदलती तस्वीर

आज भी चावल निर्यात में नंबर वन पंजाब, गेहूं के उत्पादन भी एक नंबर पर...
पिछले साल ही भारत ने चावल (गैर बासमती) के निर्यात के मामले में भी 132 फीसदी की महत्वपूर्ण वृद्धि दर्ज की थी। वहीं, गैर बासमती चावल का निर्यात 2019-20 में 13,030 करोड़ रुपये से बढ़कर 2020-21 में 30,277 करोड़ रुपये हो गया था। साल 1980-81 तक पंजाब में 3,233 हजार मीट्रिक टन धान का उत्पादन होता था, जो 2019-20 में बढ़कर 13,828 हजार मीट्रिक टन तक पहुंच गया। इस साल लगभग 14 लाख टन धान उगाया गया। पंजाब के चावल की महक खाड़ी देशों से लेकर कई यूरोपियन देशों में मिलती है।

चावल के निर्यात में अहम योगदान आज भी पंजाब का है। वहीं गेहूं के उत्पादन में भी पंजाब नंबर वन पर है। पंजाब में इस बार गेहूं की रिकॉर्ड सरकारी खरीद हुई है। रबी मार्केटिंग सीजन 2021-22 में पंजाब के किसानों से सरकार ने कुल 132.08 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीद की है जबकि पैदावार इससे काफी अधिक थी।

पंजाब में एयरपोर्ट का फैलता जाल...

अमृतसर में श्री गुरु रामदास अंतराष्ट्रीय एयरपोर्ट से यूके से लेकर कई देशों तक सीधी उड़ानें आती जाती हैं। पहले पंजाब के एनआरआई को दिल्ली से फ्लाइट लेनी पड़ती थी लेकिन अब अधिकतर उड़ानें अमृतसर से उड़ रही हैं। पंजाब में घरेलू एयरपोर्ट का जाल बिछ चुका है। पठानकोट, जालंधर के आदमपुर, बठिंडा, मोहाली, साहनेवाल में एयरपोर्ट शुरू हो चुके हैं।

नेशनल हाईवे तरक्की की राह पर..

पंजाब से कुल 29 नेशनल हाईवे निकलते हैं और कटरा एक्सप्रेस हाईवे भी तैयार किया जा रहा है। एनएच-1 पंजाब में सबसे महत्वपूर्ण और सबसे लंबे राष्ट्रीय राजमार्गों में से एक है। यह अमृतसर के पास दिल्ली और वाघा बॉर्डर (पाकिस्तान के साथ अंतरराष्ट्रीय सीमा) को जोड़ता है। पंजाब के शीर्ष 3 सबसे अधिक आबादी वाले शहर यानी लुधियाना, जालंधर और अमृतसर इस सड़क पर स्थित हैं। इस सड़क की कुल लंबाई 456 किमी है और पंजाब के भीतर इसकी लंबाई 279 किमी है। यह हाईवे -6 बन चुका है और इसको दिल्ली तक नॉन स्टाप बनाया जा रहा है।

पंजाब  होजरी, साइकिल, हैंड टूल, खेल का हब...

पंजाब साइकिल उद्योग, होजरी, स्पोट्र्स गुड्स, हैंडटूल, पाइप फिटिंग, लैदर गुड्स के अलावा मोटर पार्ट में अपने नाम का डंका बजा रहा है। 1990 के दौर में काले रंग की साइकिल से हटकर रंग बिरंगी फैंसी साइकिलें बनने लगीं। वर्ष 2010 में गियर वाली साइकिल का निर्माण हुआ और अब 2019 में इलेक्ट्रिक साइकिल लुधियाना की जमीन पर बनने लगी। इसके पीछे पंजाबियों की मेहनत और लगन है। दुनियाभर में हाईएंड साइकिलों का निर्यात किया जा रहा है। अब लक्ष्य अपने प्रमुख प्रतिद्वंद्वी चीन को पछाड़ने का है। इसके लिए साइकिल इंडस्ट्री का वर्ष 2030 तक कारोबार तीन गुना करने का लक्ष्य है।  

लगभग 110 साल पहले लुधियाना में जुराबें बनाने की एक छोटी सी यूनिट स्थापित हुई थी। जुराब की इकाई से लगा यह पौधा आज वटवृक्ष बन गया है। लुधियाना में पंजीकृत एवं गैर पंजीकृत इकाइयों की संख्या 12 से 15 हजार के बीच है और करीब 15 हजार करोड़ रुपये का सालाना कारोबार हो रहा है। इसमें से करीब सात-आठ हजार करोड़ का कारोबार वूलन सेक्टर का ही है।

पंजाबियों का कनाडा में डंका....

पंजाबी मूल के लोगों ने कनाडा में अपने नाम का डंका बजाया है। हाल ही में कनाडा चुनाव में 41 में से 16 पंजाबी जीते हैं। वहीं, 21 पंजाबी महिलाएं भी चुनावी मैदान में उतरी थीं, इनमें से 6 को ही जीत मिली। रक्षा मंत्री हरजीत सिंह सज्जन हैं। होशियारपुर से संबंधित 4 सांसदों ने कनाडा में अपने सूबे और जिले का नाम ऊंचा किया। जहां होशियारपुर की दो बेटियां सांसद रुबी सहोता व अंजू ढिल्लों (गढ़दीवाल) से दोबारा सांसद बनीं, वहीं गांव बबेली  (माहिलपुर) के रहने वाले लेफ्टिनेंट कर्नल हरजीत सिंह सज्जन तीसरी बार  चुनाव जीते। होशियारपुर से संबंधित सुख धालीवाल तो सरीं न्यूटन से 5वीं बार सांसद बने।

एक नजर में पंजाब

  • पंजाब में प्रति व्यक्ति आय.. पंजाब में प्रति व्यक्ति ( सामान्य हाउस होल्ड) औसतन मासिक आमदनी 16,020  रुपये है, जो देश में सबसे ज्यादा है।
  • पंजाब में जनसंख्या... पुरुषों की अनुमानित जनसंख्या 1 करोड़ 60 लाख के करीब  महिलाओं की अनुमानित जनसंख्या 1 करोड़ 44 लाख
  • साक्षरता 75.84% है जिसमें से साक्षरता पुरुष (प्र.) 80.44%  व साक्षरता महिलाएं 70.74% हैं।
  • पंजाब में बिजली की मांग  ... बिजली की मांग 8000 मेगावाट के करीब है
  • पंजाब का बजट ...2021- 22 के लिए 1,68,015 करोड़ रुपये का बजट
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