एनसीआरटी द्वारा मेधावी छात्रों को छात्रवृति के लिए राष्ट्र स्तर पर आयोजित कराई जाने वाली नेशनल टेलेंट सर्च एग्जामिनेशन (एनटीएसई) परीक्षा पर रोक लगा दी गई है।
हरियाणा में आयोजित इस परीक्षा में बड़े पैमाने पर धांधली के मामले सामने आए हैं। पूरे प्रदेश की तुलना में महज तीन स्कूलों के छह दर्जन से भी अधिक छात्रों को उत्तीर्ण करार दे दिया गया जबकि प्रदेश भर के शेष स्कूलों से महज दो दर्जन छात्र ही सफल रहे
जांच में धांधली के मामले साबित होने पर पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने 11 मई को होने वाली राष्ट्रीय प्रतियोगिता पर रोक लगा दी है।
हरियाणा स्टेट काउंसिल आफ रिसर्च एंड ट्रेनिंग संस्था ने पिछले वर्ष 17 नवंबर को परीक्षा आयोजित की थी। इसका परिणाम 20 फरवरी को घोषित किया गया था। राष्ट्र स्तरीय परीक्षा के लिए प्रदेश से 85 छात्रों का चयन किया जाना था।
परीक्षा में प्रदेश भर से 15737 विद्यार्थियों ने भाग लिया था, लेकिन जब नतीजा घोषित हुआ तो तीन विशेष स्कूलों से 76 विद्यार्थियों का चयन किया गया था और कुछ छात्रों के अंक समान होने के कारण चयन किए जाने वाले 85 छात्रों की तुलना में 99 छात्रों को उत्तीर्ण घोषित किया गया था।
तीन स्कूलों से 76 और प्रदेश भर के शेष स्कूलों से महज 23 छात्रों के उत्तीर्ण होने के कारण परिणाम में धांधली का आरोप लगाते हुए परीक्षा दोबारा आयोजित करने की मांग को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी।
इस याचिका पर हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को जांच के आदेश दिए थे। जांच स्कूल शिक्षा विभाग की प्रधान सचिव सुरीना राजन ने की थी। उन्होंने शुक्रवार को हाईकोर्ट में रिपोर्ट पेश की।
उल्लेखनीय है कि महेंद्रगढ़ के एक स्कूल के कई छात्रों को उत्तीर्ण करार दिया गया था और इस स्कूल ने परिणाम से ठीक एक दिन पहले समाचार पत्र में अपने स्कूल के उत्तीर्ण छात्रों के नाम प्रकाशित भी करवा दिए थे, लेकिन रोल नंबर नहीं दिए थे।
शुक्रवार को जस्टिस जीएस संधावालिया की एकल बेंच के समक्ष मामले की सुनवाई थी और रिपोर्ट में आश्चर्यचकित तथ्य सामने आने के बाद अगले आदेश तक रोक लगा दी है।