चंडीगढ़। फ्लैट का पजेशन नहीं देने पर उपभोक्ता आयोग ने बिल्डर के खिलाफ कड़ा रुख अख्तियार किया है। राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग चंडीगढ़ ने मेसर्स ओमेक्स चंडीगढ़ एक्सटेंशन डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड को निर्देश दिया है कि वह शिकायतकर्ता को रेजिडेंशियल फ्लोर का पजेशन दे। इसके साथ ही 48 लाख 30 हजार 774 रुपये पर नौ प्रतिशत वार्षिक की दर से ब्याज मुआवजा के रूप में अदा करना होगा। वहीं बीस हजार रुपये मुकदमा खर्च अदा करना होगा। पजेशन दिए जाने के बाद सेल डीड भी रजिस्टर्ड करने का निर्देश राज्य उपभोक्ता आयोग ने दिया है।
हिमाचल प्रदेश के शिमला के बी-7 लेन 4 सेक्टर-1 निवासी बलजीत सिंह और ज्योत्सना नेगी ने सेक्टर-8सी मध्य मार्ग चंडीगढ़ के मेसर्स ओमेक्स चंडीगढ़ एक्सटेंशन डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में शिकायत दी थी। शिकायत में कहा कि उन्होंने बिल्डर के न्यू चंडीगढ़ स्थित प्रोजेक्ट सेलेस्टिया रॉयल चंडीगढ़ में 1875 वर्ग फुट का एक स्वतंत्र फ्लोर बुक कराया था। 11 अप्रैल 2016 को बुकिंग कंफर्म हुई थी। 28 जुलाई 2016 को अलाटमेंट पत्र जारी हुआ। उसी दिन दोनों पक्षों के बीच समझौते पर हस्ताक्षर हुए। इस फ्लोर की कुल कीमत 69 लाख 97 हजार 725 रुपये थी। रेजिडेंशियल फ्लोर का पजेशन दो वर्ष के अंदर दिया जाना था। इसके लिए शिकायतकर्ता ने 48 लाख 30 हजार 774 रुपये अदा किए। दूसरे पक्ष ने कहा कि उन्होंने सेवा में कोताही नहीं की है। कोविड-19 के कारण निर्माण कार्य में देरी हुई है।