गोल्फर गुरबाज चंडीगढ़ में पत्रकारों से बातचीत करते हुए।
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हर गोल्फर को नई तकनीक और उपकरणों से लेस होना चाहिए। इसके बिना आगे बढ़ना मुश्किल है। एक पेशेवर गोल्फर अपडेट उपकरण की मदद के बिना गोल्फ कोर्स में लंबे समय तक टिक नहीं सकता है। यह कहना है सिटी के गोल्फर गुरबाज मान का। उनके अनुसार अभ्यास के वक्त गोल्फ स्टिक के साथ तालमेल बिठाने में गोल्फर को लंबा वक्त लग जाता है। हर खेल में उसका उपकरण खास भूमिका निभाता हैं।
लेकिन यहां समस्या यह है कि पहले से महंगे और आम लोगों की पहुंच से दूर गोल्फ के उपकरण अमरीका जैसे देश से आयात करने पड़ते हैं। इस समस्या के समाधान के लिए गोल्फर गुरबाज मान ने बीड़ा उठाया है। शुक्रवार को गोल्फ क्लब में मीडिया के साथ बातचीत में गुरबाज ने कहा कि उन्होंने अपना एक वर्ष का टारगेट रखा है, जिसके तहत नए तरह का उपकरण देश के पेशेवर गोल्फरों को आसानी से उपलब्ध हो सके।
दरअसल, ‘फैल्कन वन’ नामक इस उपकरण को गुरबाज मैनेज कर रहे हैं। मान का दावा है कि तकनीक के इस्तेमाल से एक गोल्फर अपने प्रदर्शन में सुधार ला सकता है। यहां तक कि गोल्फर अपने शॉट की स्पीड न केवल नियंत्रित कर सकते हैं, बल्कि विभिन्न गोल्फ कोर्स में उसका आंकलन भी कर सकते हैं। अभी तक 85 फीसदी से ज्यादा प्रोफेशनल गोल्फर प्रतियोगिता के दौरानअपनी क्षमता का सिर्फ साठ प्रतिशत हासिल कर पाते हैं। यही वजह है कि शॉट पर नियंत्रण न होने से अक्सर हरी और तेज गोल्फ कोर्स पर गोल्फर संघर्ष करते हैं। इस समस्या से निपटने के लिए इस उपकरण से प्रदर्शन में सुधार लाया जा सकता है। गुरबाज की मानें तो उनके अलावा पिछले एक वर्ष में शहर के अन्य गोल्फर अभिजीत चड्ढा, अंगद चीमा से लेकर सुज्जान सिंह और अजितेश संधू तक इसका इस्तेमाल कर रहे हैं, जिसके उन्हें गोल्फ कोर्स में सकारात्मक परिणाम भी मिले हैं। उन्होंने बताया कि गोल्फ में स्पोर्ट्स टेक्नोलॉजी अभी शुरुआती स्टेज में ही है। इससे हम गोल्फ को नए दायरे में ला सकते हैं।