स्पोर्ट्स एंड फिजिकल एक्सरसाईजेज इवैलुएशन एंड डेवलपमेंट (स्पीड) टेस्ट पास स्कॉलरशिप पाना अब आसान नहीं होगा। इसके लिए खिलाड़ियों को एक नई शर्त पूरी करनी होगी। इसके तहत अब खेल के मैदानों में पसीना बहाने वाले खिलाड़ियों को ही स्पीड क्लीयर करने पर स्कॉलरशिप मिलेगी।
पिछली सरकार के दौरान लागू स्कीम की कमियों को दूर करने के लिए जल्द ही प्रदेश के सभी स्टेडियम में बायोमेट्रिक अटेंडेंस सिस्टम्स लगाए जाएंगे। इसमें सभी खिलाड़ियों का ब्यौरा दर्ज होने के साथ अभ्यास के बारे में भी पूरी जानकारी होगी। खेल मंत्री का कहना है कि खेल अभ्यास के लिए पहुंचने वालेां को ही छात्रवृति का लाभ मिलने सहित इस प्रणाली के जरिये युवाओं की खेल प्रतिभा को और बेहतर रूप में निखारने का मौका मिलेगा।
खेल एवं युवा मामले मंत्री अनिल विज ने कहा कि इस स्कीम के लिए पहल किए जाने का उद्देश्य युवा खिलाड़ियों की ख्ेाल प्रतिभा को निखारना है, ताकि राज्य, राष्ट्रीय के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी प्रतिभा का बेहतरीन प्रदर्शन का उन्हें मौका मिल सके। इसके लिए नर्सरी और एकेडमी में हर तरह की खेल सुविधाएं मुहैया की गई हैं। स्पीड के तहत प्रदेश के पांच हजार खिलाड़ियों को 1500-2000 के स्कॉलरशिप के अलावा अन्य सुविधाओं का भी प्रावधान है।
नर्सरी और एकेडमी से विभिन्न खेलों में प्रशिक्षण के बाद होने वाली जांच परीक्षा(स्पीड) पास करने वालों को ही स्पीड के तहत छात्रवृति का लाभ मिल सकेगा। खेल मंत्री का कहना है कि खिलाड़ियों को स्कॉलरशिप देने का खेल प्रतिभा को निखारना है। इसके लिए अभ्यास करना भी बेहद जरूरी है और इसी भावना से इस क्षेत्र में आने वाले खिलाड़ियों को फायदा मिल सके, इसे ध्यान में रखते हुए बायोमेट्रिक सिस्टम्स की पहल की जा रही है।
गौरतलब है कि प्रदेश में 33 खेल नर्सरी जबकि 15 स्पोर्ट्स एकेडमी हैं, जहां खिलाड़ियों को तराशा जाता है। खेल प्रतिभा को तराशने के बाद स्पीड में उतीर्ण होने के बाद उन्हें विभिन्न खेलों में प्रोत्साहित करने के लिए विशेष ट्रेनिंग भी दी जाएगी। स्पीड के तहत खिलाड़ियों को छात्रवृति का लाभ मिलने में हो रही देरी के बारे में खेल मंत्री ने कहा कि बायोमेट्रिक सिस्टम्स लगाने के बाद खिलाड़ियों को इस राशि का भुगतान किया जाएगा।