बस, इसी बात को लेकर भाजपा विधायकों ने हंगामा शुरू कर दिया। विधायक असीम गोयल ने कहा कि कांग्रेसी पहले खुद आइना देखें और विचार कर लें कि कुछ ऐसा ही 1982 में हरियाणा में भी कांग्रेसियों ने किया था। इस पर नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि विरोध करने की जरूरत नहीं है, किरण चौधरी ने कुछ भी गलत नहीं कहा है, उन्होंने सिर्फ उदाहरण दिया है, लिहाजा भाजपा विधायक सुनने की भी हिम्मत रखें।
इस पर मंत्री अनिल विज ने कहा कि किरण चौधरी सदन में गलत तथ्य रख रही हैं। विज ने कहा सभी जानते हैं कि कांग्रेस के कार्यकाल में संविधान की कितनी पालना होती थी, पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने तो सन 1975 में संविधान की कैसे धज्जियां उड़ाई थी।
विज ने कहा कि इंदिरा ने तो 21 महीने तक देश में संविधान ही रोक दिया था। विज ने कहा कि किरण चौधरी सदन में गैर जिम्मेदाराना बयान दे रही हैं, इसी बहस के दौरान किरण ने स्पीकर से गुहार लगाते हुए कहा कि उन्हें सदन में बोलने नहीं दिया जा रहा है, लिहाजा उन्हें प्रोटेक्ट किया जाए।
उधर, बहस का सिलसिला थमा नहीं। विज और हुड्डा में इसी मुद्दे पर बहस और तीखी होती गई। विज ने सदन में लगे एक संदेश बोर्ड की ओर इशारा करते हुए कहा कि हुड्डा साहब इस संदेश को पढ़िए, हिंदी व अंग्रेजी दोनों में लिखा है, उसके बाद आपको समझ में आ जाएगा कि सदन में संविधान की पालना कैसे करते हैं।
इस पर हुड्डा ने कहा कि आज संविधान दिवस है और संविधान में सभी को बोलने का अधिकार है, लेकिन कांग्रेसी विधायकों को बोलने से रोका जा रहा है। इस पर स्पीकर ने हस्तक्षेप करते हुए सभी विधायकों को निर्देश दिए कि वे सिर्फ संविधान के विषय पर ही बोले, कोई राजनीतिक विवाद को बीच में लाकर चर्चा को खराब न करें।
घटनाओं को मत छेड़ें, वरना मामले बहुत निकल आएंगे
भाजपा और कांग्रेसी विधायकों की लगातार सदन में चल रही बहस के दौरान सीएम मनोहर लाल खड़े हुए और उन्होंने सभी विधायकों से आग्रह किया कि संविधान दिवस की मूल भावना को समझते हुए इस महत्वपूर्ण दिवस को किसी राजनीतिक घटना से न जोड़ा जाए, वरना घटनाएं बहुत निकल आएंगी।
सीएम ने कहा कि महाराष्ट्र में जो भी हुआ, सुप्रीम कोर्ट के माध्यम सभी व्यवस्थाएं ठीक हो रही हैं, सभी संविधान के दायरे में हैं, कोई इससे बाहर नहीं है। सीएम ने कहा कि 1982 में भी देवीलाल ने हरियाणा के सीएम की शपथ लेनी थी, लेकिन रातोंरात भजनलाल अन्य विधायकों के लेकर मुख्यमंत्री की शपथ ले गए, लेकिन संविधान सर्वदा सुप्रीम है। इसलिए संविधान पर बात करते हुए किसी राजनीतिक घटना का जिक्र करने से हमें बचना चाहिए। इस पर नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा सदन का रिकॉर्ड देख लिया जाए, किरण ने अपने वक्तव्य में कुछ गलत नहीं कहा है। इसके बाद किरण चौधरी ने अपना वक्तव्य पूरा किया।
डा. कमलगुप्ता की टिप्पणी पर फिर हुआ हंगामा
चर्चा आगे बढ़ी तो भाजपा विधायक डा. कमलगुप्ता की एक टिप्पणी ने सदन में फिर हंगामा खड़ा कर दिया। संविधान दिवस पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि यह संविधान की ही ताकत है कि एक चाय वाले को प्रधानमंत्री बना दे और प्रधानमंत्री के घर में पैदा हुआ बच्चा बाहर हो जाता है। बस, उनकी यह बात कहते ही कांग्रेसी विधायक भड़क गए। कांग्रेसियों ने स्पीकर से मांग की कि विधायक को निर्देश दें कि वह गैर जिम्मेदाराना टिप्पणी न करे। इस पर स्पीकर ने उन्हें विषय से न भटकने के निर्देश देते हुए जल्द वक्तव्य पूरा करने को कहा।