पंजाब यूनिवर्सिटी में फीस बढ़ोतरी को लेकर हंगामा जारी है। वहीं पीयू में स्कॉलरशिप को लेकर एक बहुत ही चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। दरअसल, पीयू से जुड़े 36 हजार स्टूडेंट्स में से सिर्फ 110 ने ही स्कॉलरशिप के लिए आवेदन किया, जिसमें से 94 आवेदन मंजूर भी कर लिए गए। यह स्कॉलरशिप स्टूडेंट ऐड में से उन्हें मिलती है, जिनकी पारिवारिक सालाना आय चार लाख रुपये से कम है।
अब इसे जानकारी का अभाव कहें या पीयू की तरफ से की गई प्रचार में कमी, जिससे छात्रों को पता ही नहीं चलता कि फीस में मिलने वाली छूट के अलावा अन्य तरह के प्रावधान हैं। इस मसले को आने वाले दिनों में होने वाली सीनेट मीटिंग में भी रखा जाएगा। पंजाब यूनिवर्सिटी और इसे संबंधित ओपन लर्निंग स्कूल से करीब 36 हजार स्टूडेंट जुड़े हैं। मौजूदा सेशन 2016-17 में इतनी बड़ी संख्या में से सिर्फ 110 आवेदन आए।
दाखिले के वक्त पीयू हर छात्र से 50 रुपये स्टूडेंट मदद फंड के तौर पर लेता है और उन्हीं पैसों से स्कॉलरशिप दी जाती है। सूत्रों के मुताबिक बमुश्किल ही कोई स्कॉलरशिप के लिए आवेदन करता है और यह आसानी से मिल भी जाती है। बशर्ते सभी औपचारिकता हों। इन आवेदनों को मंजूरी देने के लिए बनाई गई कमेटी के सदस्य प्रोफेसर नवदीप गोयल के मुताबिक अगर सही तरीके से और जरूरतमंद आवेदन करें तो स्कॉलरशिप दी जाती है। इसका जिक्र नियमों के साथ बाकायदा दाखिले के वक्त दी जाने वाली हैंड बुक में भी किया जाता है।
16 स्टूडेंट्स नियमों पर खरे नहीं उतरे
फीस बढ़ोतरी के विरोध में पीयू स्टूडेंट काउंसिल
- फोटो : अमर उजाला
इस सेशन में सिर्फ टीचिंग विभाग से सिर्फ 61 स्टूडेंट्स ने आवेदन किया, जबकि ओपन लर्निंग स्कूल से 49 आवेदन आए। टीचिंग विभाग से सिर्फ दो और ओपन लर्निंग से 14 आवेदन पैमाने पर खरे नहीं उतरे। इनकी रिजेक्ट होने का कारण था कि आवेदनकर्ता ने परिवार की आय का सर्टिफिकेट या तो खुद अटेस्ट किया था या फिर किसी नोटरी से कराया गया था। यह सर्टिफिकेट एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट, तहसीलदार या जहां से आय प्राप्त होती है, उस संस्थान के प्रमुख से ही अटेस्ट होना चाहिए।
आवेदन करने वाला अगर सभी पैमानों पर खरा उतरता है, तो उसे स्कॉलरशिप मिल जाती है। इस तरह की स्कीम का स्टूडेंट्स को फायदा होता है।
- प्रोफेसर नवदीप गोयल, स्कॉलरशिप कमेटी सदस्य
यूनिवर्सिटी प्रबंधन को चाहिए कि एक कमेटी बनाकर दाखिले के वक्त इस तरह की स्कीमों का प्रचार किया जाए। सिर्फ नोटिस बोर्ड पर सूचना देने से सभी जागरूक नहीं हो सकते।
- निशांत कौशल, प्रधान, पंजाब यूनिवर्सिटी कैंपस स्टूडेंट्स काउंसिल