चंडीगढ़ का मास्टर प्लान सिटी के इन्फॉरमेशन टेक्नोलॉजी पार्क की सूरत को बदल देगा। हालांकि आईटी इंटरप्रेन्योर की लाभदायक बात मास्टर प्लान में नहीं है। आईटी पार्क से हर साल अर्जित होने वाले सात सौ करोड़ रुपये के रेवेन्यू को देखते हुए प्रशासन ने फेज-3 की योजना तो बनाई पर यह योजना कामयाब नहीं हो सकी।
मास्टर प्लान में आईटी पार्क के फेज-1 और फेज-2 की जमीन का बेहतर उपयोग करने को कहा है। चंडीगढ़ के मास्टर प्लान में यह स्पष्ट है कि यह एरिया ग्रीन कवर ही रहेगा। यहां फाइव स्टार होटल पहले ही तैयार हो चुका है और पंचकूला को जोड़ने वाली रोड भी तैयार की जा चुकी है। वर्ष 2031 तक यहां एक नई सिटी की कल्पना अवश्य की जा रही है।
बड़ी कंपनी की प्लानिंग नहीं
चंडीगढ़ के आईटी पार्क में कंपनियों को लाने में प्रशासन के आईटी विभाग को काफी मेहनत करनी पड़ी। यहां आईबीएम, डीएलएफ, इंफोसिस, टेक महिंद्रा, एयरटेल सहित बीस बड़ी कंपनियों का जगह दी है। विप्रो पहले आईटी पार्क में आना चाहती थी, बाद में इसे सरेंडर कर दिया गया। अब कोई बड़ी कंपनी आईटी पार्क में नहीं आ रही है।
मास्टर प्लान में नहीं स्मार्ट सिटी
आईटी पार्क में बनाई जाने वाली स्मार्ट सिटी मास्टर प्लान में नहीं है। इस सिटी के निर्माण की योजना चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड ने चंडीगढ़ प्रशासन को सौंपी है। यह जमीन पार्श्वनाथ डेवलपर्स ने छोड़ी है। इस जमीन पर हाउसिंग बोर्ड चंडीगढ़ का सबसे अहम प्रोजेक्ट लाना चाहता है।
आईटी पार्क फेज-3 की स्थिति
आईटी पार्क फेज-3 की 250 एकड़ जमीन पर नया कंस्ट्रक्शन तोड़ने के आदेश जारी किए थे। आईटी पार्क फेज-3 में पचास से ज्यादा फॉर्म हाउस हैं। सुप्रीम कोर्ट से जमीन का अधिग्रहण रद्द होने के बाद इन फॉर्म हाउस में कॉमर्शियल एक्टिविटी बढ़ने लगी थी। यहां मैरिज और पार्टियों का आयोजन भी किया जाने लगा था।
आईटी इंटरप्रेन्योर की सुध नहीं
चंडीगढ़ के आईटी पार्क में खाली पड़ी 33 एकड़ जमीन किसी कंपनी को नहीं दी गई है। इस जमीन के बारे मेें मास्टर प्लान में भी स्पष्ट नहीं किया है। पहले यह कहा जा रहा था कि जमीन के छोटे-छोटे प्लॉट आईटी इंटरप्रेन्योर को दिए जाएंगे। आईटी इंटरप्रेन्योर की आशाएं इंडस्ट्रियल एरिया फेज-3 पर भी लगी हैं। चंडीगढ़ प्रशासन ने इंडस्ट्रियल एरिया फेज-3 में आईटी इंटरप्रेन्योर को जगह देने की बात की है।
आईटी इंडस्ट्री पर भारी किराया
चंडीगढ़ के आईटी पार्क के इंटरप्रेन्योर के अनुसार आईटी पार्क में उन्हें भारी भरकम किराया देना पड़ रहा है। आईटी पार्क में औसतन किराया तीन लाख रुपये चुकाना पड़ रहा है। तीन लाख रुपये देने के बावजूद उद्यमियों के पास पर्याप्त स्थान नहीं है।