कांग्रेस में सियासत पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलती आई है। पंजाब विधानसभा चुनाव 2017 में भी कई दिग्गजों ने अपनी सियासी विरासत अगली पीढ़ी को सौंपी। पंजाब में सात युवा नेताओं ने अपनी विरासत को संजोते हुए पहली बार चुनाव मैदान में कदम रखा है। मास्टर गुरबंता सिंह और दर्शन सिंह केपी जैसे दिग्गज हों या फिर बेअंत सिंह और राजमाता मोहिंदर कौर, सभी की अगली पीढ़ियों ने कमान संभाल ली है।
पंजाब की सियासत में पीढ़ियों की बात करें तो कैप्टन अमरिंदर सिंह को सियासत की घुट्टी अपनी मां राजमाता मोहिंदर कौर से मिली तो प्रताप सिंह बाजवा के पिता सतनाम सिंह बाजवा भी पहले शिअद, फिर कांग्रेस के नेता रहे। मोहिंदर सिंह केपी के पिता दर्शन सिंह केपी पांच बार विधायक बने। चौधरी संतोख के पिता मास्टर गुरबंता सिंह पंजाब के बड़े दलित नेता थे। सुनील जाखड़ के पिता बलराम जाखड़ भी कद्दावर कांग्रेसी नेता थे।
वहीं, रवनीत बिट्टू, पूर्व सीएम दिवंगत बेअंत सिंह के पौत्र हैं। विजय इंदर सिंगला के पिता संतराम सिंगला कांग्रेस के बड़े नेताओं में से थे। इसबार कई और परिवार हैं, जिनकी अगली पीढ़ी ने चुनावी सफर शुरू किया है। नवांशहर से कांग्रेस ने इस बार सिटिंग एमएलए गुरइकबाल कौर के बेटे अंगद सैनी को टिकट दिया है। वह इस चुनाव में सबसे युवा उम्मीदवारों में से एक हैं।
फिल्लौर से पार्टी ने जालंधर के सांसद चौधरी संतोख के बेटे बिक्रम चौधरी को उम्मीदवार बनाया है। बिक्रम प्रदेश यूथ कांग्रेस प्रधान रह चुके हैं और लोकसभा चुनाव में भी टिकट के दावेदार थे। पहले उनकी मां को टिकट दिया गया था, बाद में उन्हें दिया गया। चौधरी परिवार के ही एक और सदस्य सुरिंदर सिंह चौधरी भी करतारपुर सीट से पहली बार चुनाव मैदान मे हैं। इस सीट का प्रतिनिधित्व उनके पिता दिवंगत चौधरी जगजीत सिंह करते रहे हैं।