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PGI के गरीब मरीजों के मसीहा 'चड्ढा बाबा' नहीं रहे, खुद को मार ली गोली

Thu, 04 Jan 2018 09:46 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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Inderpreet Singh Chadha - फोटो : File Photo
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पीजीआई में आने वाले मरीजों के मर्ज का इलाज तो डाक्टरों के पास है, लेकिन मर्ज की दवा खरीदने के लिए जिनके पास पैसे नहीं होते, उसका इंतजाम करते थे पीजीआई के गुरुद्वारे वाले इंद्रप्रीत सिंह चड्ढा।
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वह मरीजों के बीच चड्ढा बाबा के नाम से भी मशहूर थे, लेकिन वे अब नहीं रहे। बुधवार को उनकी खुदकुशी की सूचना जैसे ही पीजीआई स्थित गुरुद्वारे में आई तो मातम छा गया। यहां रह रही एक महिला मरीज चरणजीत कौर को तो दौरा भी पड़ गया, जिसे पीजीआई में दाखिल कराया गया। चरणजीत कौर के अलावा कितने ही ऐसे मरीज और उनके तीमारदार तो सदमे में हैं। गुरुद्वारे में पसरे सन्नाटे के बीच जो कोई भी दिखा, उसकी आंखें नम थी।

एक सेवादार ने बताया कि वे अभी पिछले हफ्ते ही गुरुद्वारे आए थे और यहां रह रहे मरीज और उनके तीमारदारों से मिले। दफ्तर के कुछ काम निपटाए और इस सप्ताह के आखिर में आने की बात कहकर गए, लेकिन पता नहीं था कि वे अब कभी नहीं आएंगे। नम आंखों से उसने कहा कि वे अपने सभी बच्चों को छोड़ गए। 
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600 लोगों को दी जाती है पेंशन

चरणजीत सिंह चड्ढा और बेटा इंद्रप्रीत सिंह - फोटो : File Photo
पीजीआई में बहुत से ऐसे मरीज आते हैं जिनके पास इलाज कराने के पैसे नहीं होते। ऐसे में उनका सहारा बनता है पीजीआई की गोल मार्केट के पास बना गुरुद्वारा। यहां इंद्रपीत चड्ढा ना केवल मरीज के तीमारदारों को पनाह देते थे, बल्कि मरीज के इलाज का पूरा खर्च भी उठाया जाता है।

कोई गिनती नहीं है कि अब तक कितने लोगों का इलाज कराया जा चुका है। इसमें कैंसर और किडनी ट्रांसप्लांट जैसे गंभीर रोगी भी हैं। मरीज के इलाज का खर्च देने के अलावा उनके बच्चों को पढ़ाने का भी जिम्मा गुरुद्वारे के सेवादार ही उठाते हैं। एक सेवादार ने बताया कि हर महीने 10 से 12 लाख रुपये मरीजों की दवा और उनकी देखरेख पर खर्च होता है। भरे मन से बताया कि अब आगे क्या होगा कुछ नहीं कह सकते।

300 मरीजों के लिए रोजाना बनता है दो वक्त का खाना
गुरुद्वारे में रोजाना करीब 300 मरीजों के लिए दो वक्त का खाना बनाया जाता है। खाना लेकर सेवादार पीजीआई में जाते हैं और खाना बांटते हैं। यह सेवा कई साल से चल रही है। अब इसका भविष्य क्या है, यह किसी को नहीं पता।

600 लोगों को दी जाती है पेंशन
इंद्र्रप्रीत सिंह की तरफ से करीब 600 लोगों को हर माह 1500 रुपये की पेंशन दी जाती है। इनमें ऐसी महिलाएं भी हैं, जिनके पति की पीजीआई में इलाज के दौरान मौत हो गई। चूंकि वे दूसरे प्रदेश से आई थीं तो सरकारी पेंशन में दिक्कत आती है। ऐसे में उन्हें पेंशन हर माह बैंक खाते में दी जाती है।
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