चंडीगढ़। रिसर्च स्कॉलर्स (शोधार्थी) के लिए पंजाब विश्वविद्यालय (पीयू) के दरवाजे फिर खुल गए हैं लेकिन कुछ शिक्षक कोरोना के डर से घरों से ही काम कर रहे हैं। ऐसे में शोधार्थी परेशान हैं क्योंकि उन्हें शोध के लिए सही मार्गदर्शन नहीं मिल रहा है। उनका कहना है कि यही हाल रहा तो वह इसको लेकर आवाज उठाएंगे।
तीन साल से शोध कर रहे शोधार्थियों के लिए पीयू एक नवंबर से खोल दी गई। तमाम शोधार्थी आ भी गए और छात्रावासों में रह रहे हैं। साथ ही कुछ अपने गाइड से मिलने विभागों में जा रहे हैं ताकि शोधकार्य आगे बढ़ सके। वहीं, दूसरी ओर कुछ शोधार्थी मायूस हैं। नाम न छापने की शर्त पर कुछ शोधार्थियों ने बताया कि उनके लिए तो पीयू आज भी बंद जैसी ही है क्योंकि वह अपने शोध को आगे बढ़ाने के लिए यहां पहुंचे थे लेकिन उन्हें शिक्षकों का मार्गदर्शन ही नहीं मिल रहा। उनके गाइड घरों से ही काम कर रहे हैं। वह फोन के जरिए या ऑनलाइन जानकारी दे रहे हैं। इस प्रक्रिया से उनका कार्य अधिक प्रभावी नहीं हो पा रहा है। उन्होंने यह भी कहना है कि पीयू को हर शिक्षक के लिए विभाग आना अनिवार्य किया जाना चाहिए। अधिकांश शिक्षक आ रहे हैं तो बाकी शिक्षक भी आ सकते हैं। इस पर पीयू को विचार करना चाहिए ताकि शोधार्थियों की परेशानी हल हो सके।