कई लोग ऐसे भी हैं जो दूसरों की जिंदगी में भी खुशियां बिखेरते हैं। ऐसी ही एक संस्था है ‘लिव फॉर ह्यूमेनिटी’, जो पिछले साढ़े तीन साल से समाजसेवा का काम कर रही है। यह संस्था मरीजों को खून और प्लेटलेट्स उपलब्ध कराने का काम करती है। इस संस्था में पूरी ट्राइसिटी से हजारों लोग जुड़े हुए हैं। यह लोग सूचना मिलते ही अस्पताल पहुंचकर जरूरतमंद को खून देकर उन्हें नई जिंदगी देते हैं।
यह संस्था लाइव वर्क ज्यादा करती है। रक्तदान शिविर लगातार आयोजित करती रहती है। कई बार हमारे जीवन में ऐसी घटनाएं हो जाती हैं, जो हमारी जिंदगी का रुख ही बदल देती हैं। दोस्त की मां को खून देने के बाद सेक्टर-22 के सतीश सचदेवा की जिंदगी का पूरा रुख ही बदल गया। इसके बाद उन्होंने इस संस्था की शुरुआत की। यह संस्था पूरे देश में कार्य कर रही है।
इस संस्था के सदस्य सूचना मिलते ही अस्पताल पहुंचकर रक्त और प्लेटलेट्स देते हैं। चंडीगढ़ से यह संस्था 2016 में शुरू हुई थी। धीरे-धीरे लोग इससे जुड़ते चले गए। आज इस संस्था के साथ पूरे देश के लोग जुड़कर लोगों की सहायता कर रहे हैं।
97 बार दे चुके हैं प्लेटलेट्स
मेरे कहने पर मेरे दोस्त रक्तदान करने अस्पताल पहुंच जाते थे। उसके बाद मेरे पिताजी ने मुझे सलाह दी कि मैं एक ऐसी संस्था शुरू करूं, जिसमें ऐसे लोग शामिल हों जो जरूरतमंदों को सहायता करना चाहते हों। उसके बाद मैंने यह संस्था शुरू की। मैं खुद 97 बार प्लेटलेट्स और 22 बार खून दे चुका हूं।
- सतीश सचदेवा, प्रेसिडेंट, लिव फॉर ह्यूमेनिटी
प्लेटलेट्स देने में जो सुकून वह किसी काम में नहीं
चार महीने पहले मैं लिव फॉर ह्यूमेनिटी संस्था के साथ जुड़ी हूं। इससे पहले मैं बहुत बार रक्तदान कर चुकी हूं। संस्था से जुड़कर मैंने प्लेटलेट्स देना शुरू किया। मेरे पिताजी की प्लेटलेट्स कम होने के कारण मौत हो गई थी। तभी से मैंने लोगों की सेवा करना शुरू किया था।
- रशपाल कौर, सेक्टर-47
डॉक्टर्स ने किया जागरूक तब से दे रहा प्लेटलेट्स
मैं 1995 से रक्तदान कर रहा हूं। अभी तक मैं 125 बार ब्लड दे चुका हूं। एक दिन पीजीआई डॉक्टर्स ने हमें प्रेरित किया कि ब्लड तो कोई भी दे सकता है, लेकिन प्लेटलेट्स देने के लोगों को जागरूक होना बहुत जरूरी है। डॉक्टर्स के जागरूक करने के बाद मैंने प्लेटलेट्स देना शुरू किया। अब तक मैं 77 बार प्लेटलेट्स दे चुका हूं।
- कालू त्यागी, सेक्टर-26