खास बात यह रही कि वेतनमान संशोधन रिपोर्ट के लिए आयोग का कार्यकाल लगातार बढ़ाया जाता रहा जबकि आयोग के समक्ष अब तक वेतनमान, भत्ते, वेतन-विसंगतियों और अन्य मुद्दों को लेकर राज्य सरकार के कर्मचारियों के विभिन्न संघ और अन्य समूहों की ओर से 600 से अधिक रिप्रेजेंटेशन दी जा चुकी हैं।
आयोग के पास न स्टाफ है न आफिस
आयोग के गठन और इसके कामकाज को लेकर कर्मचारी संगठन शुरु से ही आवाज उठाते रहे हैं। दरअसल, आयोग का गठन करने और उसके अध्यक्ष के बदलने के बाद भी राज्य सरकार ने आयोग को कोई कार्यालय स्टाफ नहीं दिया। बस, चेयरमैन और सदस्य के रूप में ही यह आयोग चलता रहा।
जनवरी, 2019 में आयोग ने सभी विभागों से कर्मचारियों संबंधी डाटा तलब किया था लेकिन यह डाटा कम्पाइल करने के लिए आयोग के पास स्टाफ ही नहीं है और प्रदेश के 3.5 लाख कर्मचारियों का डाटा कब कम्पाइल होगा, इसके बारे में कोई भी दावे से कुछ कहने को तैयार नहीं है। इसे देखते हुए सरकार ने 31 दिसंबर, 2019 तक आयोग का कार्यकाल बढ़ाया था।
जुलाई, 2019 में राज्य सरकार ने 15वें वित्त आयोग सेल को ही छठे पंजाब वेतन आयोग के सेल के रूप में स्थापित करने का फैसला लिया। इसका उद्देश्य छठे पंजाब वेतन आयोग को आवश्यक सूचना/डाटा मुहैया कराना था, जिस पर वित्त आयोग सेल में कार्यरत अधिकारी और कर्मचारियों को ही काम का जिम्मा सौंपा गया था। यह फैसला वित्त मंत्री की मंजूरी के बाद लिया गया था।
घोंघे की चाल चल रहा वेतन आयोग : खैरा
पंजाब सिविल सचिवालय कर्मचारी एसोसिएशन और कर्मचारियों की ज्वाइंट एक्शन कमेटी के प्रमुख सुखचैन सिंह खैरा का कहना है कि वेतन आयोग घोंघे की चाल से चल रहा है। संशोधित वेतनमान तो दूर कर्मचारियों को पहले से लंबित डीए की किश्तें देने में भी सरकार बहाने बना रही है।