अपने किचन गार्डन में एक वर्ष में मौसम के हिसाब से तीन बार पैदावार ले सकते हैं। इसमें बसंत कालीन सब्जी की पौध फरवरी-मार्च माह में लगा सकते हैं। जिसमें भिंडी, करेला, घीया, टिंडा, तोरई, ग्वार फली, लोबिया, टमाटर, बैंगन व मिर्ची शामिल है। इसके अलावा बरसात काल में उपरोक्त सब्जियों के अलावा चौलाई व बीन तथा सेम आदि की बिजाई करें। वहीं शीतकाल में गाजर, मूली, शलजम, चुकंदर, फूलगोभी, पत्ता गोभी, आलू, टमाटर, पालक, धनिया, बैंगन, शिमला मिर्च आदि की पौध या बीज बो सकते हैं।
छत से लेकर बरामदे तक ले सकते हैं पैदावार
किचन गार्डन उन लोगों के लिए भी वरदान है जिनके पास जमीन नहीं है। ऐसे लोग अपने घर की छत से लेकर बरामदे या खाली जमीन पर किचन गार्डन लगा सकते हैं। इसके लिए पुराने या नए गमले, प्लास्टिक के टूटे टीन व ड्रम का भी प्रयोग कर सकते हैं। यह घर की सुंदरता बढ़ाने के साथ-साथ सेहत के लिए भी लाभकारी साबित होगा। इसके लिए अधिक बड़े घर, जमीन, प्लॉट आदि की भी जरूरत नहीं है। जितना है उतने में ही आसानी से तैयार कर सकते हैं।
समय के सदुपयोग के साथ धन की बचत
किचन गार्डन लगाकर समय, धन व पानी की बचत कर सकेंगे। इसके अलावा प्राकृतिक रूप से केमिकल रहित सब्जियों से सेहत भी बनी रहेगी। खाली समय का सदुपयोग कर अपने द्वारा तैयार की गई सब्जी का स्वाद भी ले सकेंगे। घर के बेकार समझे जाने वाले पानी से भी आपका किचन गार्डन तरोताजा बना रहेगा।
केवीके के वैज्ञानिक दे रहे बढ़ावा
कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) रामपुरा के बागवानी विशेषज्ञ डॉ. प्रमोद कुमार यादव ने बताया कि केवीके द्वारा पिछले दिनों पोषण वाटिका को बढ़ावा देने के लिए अभियान चलाया गया था। जिला के करीब 6 हजार परिवारों ने किचन गार्डन लगाया है। इसके लिए वैज्ञानिकों द्वारा तकनीकी जानकारी देने से लेकर बीज एवं पौध उपलब्ध कराई जाती हैं। पोषण वाटिका से वर्षभर आर्गेनिक सब्जी लेकर परिवार की सेहत का ख्याल रखा जा सकता है।