21 दिन तक व्यस्क अवस्था रहती है। सर्दी के मौसम में टिड्डी का प्रजजन क्षेत्र पाकिस्तान- ईरान बार्डर, सऊदी अरब व मिस्र का एरिया रहता है, जबकि गर्मी के मौसम में राजस्थान से लगता पाकिस्तान का रेतीला क्षेत्र व अफ्रीकी क्षेत्र होता है। मौसम के हिसाब से टिड्डी दल न केवल प्रजनन करता है, बल्कि एरिया में सक्रिय भी रहता है।
तीन तरह के उपाय से फसल का बचाव संभव
- टिड्डी दल खेत में नालियों के अंदर समूह के तौर पर एकत्रित होकर बैठता है। तत्काल मिट्टी डालकर उसे दबाया जा सकता है।
- ढोल, नगाड़े व पटाखों के शोर से इसे उड़ाया जा सकता है।
- कीटनाशक मीलाथीओन के छिड़काव से खत्म किया जा सकता है।
- हस्तचालित मशीन से प्रति घंटा एक हेक्टेयर
- ट्रैक्टर के पीछे मशीन बांधकर पंप से प्रति घंटा 25 हेक्टेयर में छिड़काव।
- :मोटर युक्त मशीन से प्रति घंटा 40 हेक्टेयर में छिड़काव।
राजस्थान से लगती सीमा में खतरा
प्रदेश के जिले सिरसा, हिसार, भिवानी व महेंद्रगढ़ की सीमा पर राजस्थान का रेतीला एरिया लगता है। गुजरात के भुज से लेकर राजस्थान के चुरू जिले तक इसकी सबसे ज्यादा सक्रियता रहती है। कृषि विभाग के अधिकारी बताते हैं कि 1998 में भिवानी, हिसार, सिरसा व महेंद्रगढ़ जिले में टिड्डी दल का प्रकोप नजर आया था। अब पिछले दिनों टिड्डी दल सिरसा की राजस्थान से लगती सीमा तक आ गया था। हालांकि हवा का रुख बदलने से टिड्डी दल वापस राजस्थान की ओर चल गया।
रेगिस्तानी टिड्डी ग्रास हॉपर से बड़ी होती है, जो न केवल लंबी दूरी तक उड़ान भरती है, बल्कि हरी दिखाई देनी वाली हर तरह की फसल, पेड़ व पौधों के पत्तों को खाती है। राजस्थान से लगते जिले सिरसा, हिसार, भिवानी व महेंदगढ़ में अलर्ट किया गया है। किसानों को भी टिड्डी पर कड़ी निगाह रखनी है, ताकि समय पर उससे बचाव हो सके। - रोहताश सिंह, जिला कृषि विकास अधिकारी