पीजीआई का गोलमोल बयान
इस पूरे मामले पर पीजीआई प्रशासन ने मंगलवार शाम को गोलमोल बयान जारी किया। पीजीआई प्रवक्ता के अनुसार, एक सितंबर को सर्जरी के बाद लगातार मरीजों की हालत बिगड़ने लगी। न्यूरोसर्जरी विभाग के मरीजों में सर्जरी के बाद यूरिन पास होना बंद हो गया और उन्हें पीलिया हो गया। हालत बिगड़ने पर चिकित्सा अधीक्षक ने तत्काल न्यूरोसर्जरी व एनेस्थिसिया विभाग के प्रमुख के साथ बैठक की।
इसमें न्यूरोसर्जरी विभाग के प्रमुख प्रो. एसके गुप्ता को मामले की जांच सौंपी गई है। इस संबंध में दो बार बैठक हो चुकी है लेकिन अब तक अंतिम रिपोर्ट नहीं आई है। वहीं, इसकी सूचना यूटी प्रशासन को दे दी गई है। इसके बाद सीडीएससीओ यूटी व बद्दी के ड्रग कंट्रोलर ने दुकान से प्रोपोफोल दवा का नमूना लेकर जांच के लिए भेज दिया है। उनके स्तर पर भी मामले में जांच शुरू कर दी गई है। इन दलीलों के साथ पीजीआई प्रशासन का यह कहना है कि सभी स्तर पर रिपोर्ट आने के बाद ही उचित कार्रवाई की जाएगी।
पीजीआई से आपूर्ति थी बंद
जानकारी के अनुसार, पीजीआई में इन दिनों प्रोपोफोल दवा की आपूर्ति बंद है। कर्मचारियों का कहना है कि जबकि इसकी अनुपलब्धता की जानकारी फार्मेसी से लगातार प्रशासन को दी जा रही है। इस कमी का फायदा उठाते हुए ही निजी दवा की दुकान वाले यहां-वहां से माल लेकर पीजीआई में खपाने की फिराक में लगे हैं। इसका परिणाम इस रूप में सामने आया है।
शिकायत मिलने पर ड्रग इंस्पेक्टर ने टीम के साथ पीजीआई जाकर प्रोपोफोल दवा की बैच का स्टॉक कब्जे में ले लिया है। साथ ही दवा के नमूने लेकर जांच को भेजा है। इस बैच की दवा की खरीद-फरोख्त पर रोक लगा दी गई है। इस संबंध में शहर के सभी वितरकों को निर्देश दे दिया गया है। जब्त की गई दवा मार्च 2022 बैच की है। इस मामले में किसी मरीज की मौत का मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। - यशपाल गर्ग, स्वास्थ्य सचिव, चंडीगढ़।