कोरोना संक्रमित मरीजों के लिए प्रशासन की ओर से जारी किए जा रहे अलग-अलग नियम तनाव बढ़ाने का काम कर रहे हैं। सेक्टर-44 निवासी नरेंद्र पांडेय के परिवार में एक सदस्य की जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर उन्हें 24 सितंबर से क्वारंटीन किया गया था। दूसरी तरफ अचानक से उनके इलाके को कंटेनमेंट घोषित कर एक अक्तूबर को नरेंद्र के मकान के साथ 17 अन्य मकानों (मकान नंबर 3045 से 3050 तक) के परिवारों को क्वारंटीन कर दिया गया।
पूछने पर बताया गया कि 24 तारीख की बजाय अब उनकी भी क्वारंटीन की अवधि एक अक्तूबर से शुरू मानी जाएगी। इससे नरेंद्र का परिवार बेहद तनाव में है। नरेेेंद्र का कहना है कि वह मधुमेह रोगी हैं। ऐसी स्थिति में मनमाने तरीके से क्वारंटीन किए जाने पर उनकी दवाइयां व आवश्यकता की अन्य चीजें घर में नहीं पहुंच पा रही हैं। नरेंद्र का कहना है कि प्रशासन को छह दिन के बाद यह ख्याल क्यों आया कि हमारे घर से अन्य लोगों को भी संक्रमण फैल सकता है।
इस बारे में विकास गोयल, स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट ने कहा कि अगर ऐसा कुछ है तो परिवार किसी भी समय मुझसे संपर्क कर सकता है। कंटेनमेंट जोन में आने वाले प्रत्येक व्यक्ति की मदद की जा रही है। अगर कोई ऐसी समस्या आ रही है तो उसका प्राथमिकता के आधार पर निवारण किया जाएगा।
जरूरत की चीजें नहीं मिलने से हो रही परेशानी
नरेंद्र ने बताया कि अचानक एक अक्तूबर को उनके मोहल्ले में आकर अन्य तीन ब्लॉक के 17 फ्लैट के परिवारों को क्वारंटीन कर दिया गया है जबकि उन सभी की जांच रिपोर्ट 2 अक्तूबर को निगेटिव आ चुकी है। नरेंद्र का कहना है कि 24 सितंबर के हिसाब से उनकी क्वारंटीन अवधि नौ अक्तूबर को समाप्त हो जानी चाहिए थी लेकिन अब उन्हें 14 अक्तूबर तक घर में कैद रहने का आदेश मिला है।
नरेंद्र ने बताया कि जिस दिन से उनका परिवार क्वारंटीन हुआ है, उस दिन से न तो कोई कूड़ा उठाने वाला आया व न ही कोई प्रशासन की तरफ से उनकी मदद के लिए आया है। ऐसी स्थिति में घर में न तो सब्जी है, न दूध और न ही दवाइयां।
प्रशासन के रवैये से बढ़ रहा तनाव
नरेंद्र ने बताया कि बेटे के संक्रमित होने के बाद से मैं और मेरी पत्नी बेहद तनाव में हैं। उसके बाद से प्रशासन की ओर से किया जा रहा गलत व्यवहार हमारे तनाव को और बढ़ा रहा है। अगर यही स्थिति रही तो हम अवसाद के शिकार हो जाएंगे। नरेंद्र का कहना है कि बेटे के संक्रमित आने के बाद हमें क्वारंटीन होने का आदेश तो दे दिया गया लेकिन 24 सितंबर से 3 अक्तूबर के बीच में एक बार भी प्रशासन या स्वास्थ्य विभाग की तरफ से किसी ने यह नहीं बताया कि बेटे को कौन सी दवाई देनी है।